TRANSIT CHANDRKALANAL CHAKR #jyotish #jyotishshastra #jyotishupay #jyotishvidhya #jyotishastrology
AMARJYOTISH
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चन्द्रकालानल चक्र
अभी हमने कई सुन्दर चक्रों के बारे में सीखा जिनसे हम देश-देशान्तर के लाभ-हानि की विवेचना यथार्थ रूप से कर सकते हैं। शास्त्रों में चन्द्रमा तथा सूर्य प्रभु के नेत्र कहे गये हैं। ये काल का भी विनाश कर सकते हैं। कालानल दसअसल काल तथा अनल, दो शब्दों से बना है जिसका अर्थ काल के लिये अग्नि समान होना अथवा काल को भी पचाने की शक्ति रखना होता है। मानसागरी में दो विशिष्ट प्रकार के, क्रमशः चन्द्र कालानल तथा सूर्य कालानल, चक्रों का संक्षिप्त वर्णन तथा उपयोग उपलब्ध है। श्री नारद पुराण में भी इन चक्रों की चर्चा है।
चन्द्रमा की गति तीव्र होने के कारण किसी जातक के दैनिक जीवन पर गोचर के ग्रहों के प्रभाव की महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाती है। क्योंकि चन्द्रमा एक नक्षत्र में प्रायः एक दिन ही रहते हैं, इसलिए इस चक्र की उपयोगिता दैनिक मानसिकता निर्धारण में प्रबल रूप से सहायक होती है।
किसी भी दिन अगर हम जानना चाहें कि आज हानि होगी या लाभ, दिन अच्छा गुजरेगा या मुसीबत भरा होगा, विजय होगी या पराजय, तो गोचर के ग्रहों को चन्द्र कालानल चक्र में बैठा कर यह जानकारी ली जा सकती है।
चन्द्र कालानल चक्र की बनावट:
1. सबसे पहले एक गोला बनायें — यह चन्द्र चक्र का गर्भ है।
2. इस गोले में एक खड़ी (1,15) और एक पड़ी (22,8) रेखा खींचें। इन दो रेखाओं के चारों आरम्भिक स्थानों पर एक-एक त्रिशूल बनायें।
3. अब इन दो रेखाओं को दो आड़ी रेखाएं (क-क, ख-ख) खींच कर फिर विभाजित करें (चित्र देखें)। इस प्रकार गर्भ के आठ भाग हो गये।
4. सबसे ऊपर के त्रिशूल के बीच वाले फाल पर 1 लिखें। वहाँ से दाहिने 2 लिख कर नीचे उतर जायें। गर्भ से पहले 3, गर्भ में 4, 4 के बाद 5 तथा बाहर 6 लिख कर दक्षिण दिशा के फालों पर 7, 8 तथा 9 लिख कर फिर गर्भ की ओर चलें। गर्भ से पहले 10, गर्भ के अन्दर 11, उसके आगे 12 फिर गर्भ से बाहर 13 लिख कर पश्चिम के त्रिशूल के फालों पर 14, 15 तथा 16 लिख कर अन्दर जायें। बताये तरीके से क-क तथा ख-ख विभाजक रेखाओं को छोड़कर चित्र के अनुसार 28 तक की संख्या लिख कर चन्द्र कालानल चक्र तैयार कर लें। अब देखें कि इस चक्र में जन्म नक्षत्र कहाँ पड़ा है?
प्रयोग विधि
जिस दिन इसका प्रयोग करना हो उस दिन के नक्षत्र को ऊपर की ओर बने त्रिशूल के बीच वाले फाल पर लिखें। अब बाकी के नक्षत्र अभिजित सहित सिलसिलेवार ढंग से लिख दें। (चित्र देखें) आइये इसे विस्तार से समझते हैं। जन्म नक्षत्र को चक्र पर हम बैठा चुके हैं। यहाँ तीन ही संभावनाएँ हो सकती हैं।
(1) जन्म नक्षत्र एक दम बाहर, त्रिशूलों की नोक पर आ गया हो।
(2) जन्म नक्षत्र त्रिशूल तथा गर्भ के बीच के आठ नक्षत्रों (3, 6, 10, 13, 17, 20, 24 तथा 27) पर आ जाये तब जातक का दिन न अच्छा होगा न बुरा। सामान्य से नतीजे होंगे।
(3) तीसरी संभावना है कि जन्म नक्षत्र गर्भ क्षेत्र में पड़े। गर्भ में शिशु सुरक्षित रहता है अतः जन्म नक्षत्र का गर्भ के अन्दर होना शुभ है। यह आठों स्थान (4, 5, 11, 12, 18, 19, 25, 26) धन, सम्पदा, सुख (4, 5), विजय, भाग्योदय (11, 12), मान, सम्मान, आदर (18, 19), उपलब्धियाँ, भाग्य, शुभ नतीजे (25, 26) देते हैं।
यह चक्र एक तरह से उस दिन के चन्द्रमा से जातक के जन्म कालीन चन्द्र का मिलान कर रहा है और अगर जन्म कालीन चन्द्र (जन्म नक्षत्र) उस दिन के नक्षत्र (चन्द्र के) से 1, 2, 7, 8, 9, 14, 15, 16, 21, 22, 23 और 28वें नक्षत्र पर नहीं है तो वह दिन शुभ होगा।
मानसागरी के मूल श्लोक में ‘जन्म’ नक्षत्र की चर्चा नहीं की गयी है। उसमें ‘नाम’ नक्षत्र की चर्चा की गयी है। श्लोक देखिये—
“नामाक्षरं तु स्थिरञ्च, ज्ञेयं तत्र शुभाशुभम्”
अर्थात् प्रचलित नाम से पता चलने वाले नक्षत्र की चन्द्र कालानल चक्र में स्थिति से शुभता और अशुभता जाननी चाहिये। ऐसा सम्भवत: इसलिए कहा गया कि यदि जातक को जन्म नक्षत्र याद ना भी हो तो कोई बात नहीं क्योंकि अभी हाल तक तो यही प्रबल सम्भावना होती थी कि व्यक्ति का नामकरण उसके जन्म नक्षत्र के आधार पर ही होता था। आगे मानसागरी में कहा गया है—
“त्रिशूले तु भवेत् मृत्युमृगर्भयं बहिराष्टके।
आयुः प्रजा जयो लाभश्चन्द्रभे न संशयः॥”
अर्थात् यदि नाम नक्षत्र त्रिशूल पर पड़े तो मृत्यु (मृत्यु तुल्य कष्ट), गर्भ से बाहर के आठ नक्षत्रों (3, 6, 10, 13, 17, 20, 24, 27) पर पड़े तो मध्यम तथा गर्भ में पड़े तो लाभ होने में संशय नहीं होना चाहिये।
कई बार जो प्रश्न मन में आते हैं कि आखिर इतने सारे उपलब्ध उपायों में किसका प्रयोग किया जाये? आखिर यह दिन कैसा बीतेगा, इसके लिये हमारे पास समुदाय अष्टक वर्ग पर आधारित सारणी है—अब यह चन्द्र कालानल चक्र एक नया तमाशा हुआ!
सत्य यही है कि जैसे एक बीमारी का नतीजा जानने के लिये हम एक से अधिक डॉक्टर के पास जाते हैं, वैसे ही कई रास्तों से चल कर सत्य तक अवश्य पहुँचा जा सकता है। चन्द्र कालानल के अद्भुत फल प्राप्त होते देखे गये हैं।