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गूंज के अंत में लीन होकर ध्यान में उतरें |वाद्य ध्वनि का रहस्य: विज्ञान भैरव तंत्र(भाग 18)3/10/2026

असीमबोध अपरोक्षानुभूति

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गूंज के अंत में लीन होकर ध्यान में उतरें |वाद्य ध्वनि का रहस्य: विज्ञान भैरव तंत्र(भाग 18)3/10/2026

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   • विज्ञान भैरव तंत्र   विज्ञान भैरव तंत्र: संगीत की गूंज और मौन में लय — वाद्य ध्वनि साधना | भाग 18 ​वाद्य ध्वनि का रहस्य: गूंज के अंत में लीन होकर ध्यान में उतरें | विज्ञान भैरव तंत्र भाग 18 अहम की देहरी पार अनंत का बोध सर्व व्यापी परमात्मा नमो नमः ​विज्ञान भैरव तंत्र के इस 18वें भाग में भगवान शिव द्वारा बताई गई संगीत और नाद साधना की एक अत्यंत सुंदर व सूक्ष्म विधि का वर्णन किया गया है। ​जब किसी वाद्य यंत्र (जैसे वीणा, तानपुरा या घंटी) से ध्वनि उत्पन्न होती है, तो वह हवा में फैलती है और धीरे-धीरे शांत होती है। इस साधना में साधक को केवल बजती हुई ध्वनि को ही नहीं सुनना है, बल्कि ध्वनि के धीरे-धीरे क्षीण होने और अंत में जिस मौन (सन्नाटे) में वह विलीन हो जाती है, उस अंतिम बिंदु पर ध्यान टिकाना है। जैसे ही ध्वनि मौन में बदलती है, साधक का मन भी स्वतः ही उस निर्गुण-निराकार असीम सन्नाटे में विलीन हो जाता है। ​इस वीडियो में आप जानेंगे: ​वाद्य यंत्रों की ध्वनि के विस्तार और उसकी गूंज के अंत पर ध्यान लगाने की सही तकनीक। ​गूंज के समाप्त होने पर प्रकट होने वाले मौन का आध्यात्मिक रहस्य। ​संगीत साधना से निर्गुण निराकार परमात्मा का बोध प्राप्त करने का सहज मार्ग। ​मन के विचारों को तुरंत शांत कर परम शून्यता का अनुभव करना।