Shri Jaidayal Dalmia, A Life Dedicated to Sanatan Values, Narration by his son Raghu Hari Dalmia
Shashtrarth
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Shri Jaidayal Dalmia, A Life Dedicated to Sanatan Values, Narration by his son Raghu Hari Dalmia
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भारतीय संस्कृति में व्यापार या आर्थिक गतिविधियाँ भी चार पुरुषार्थों में से एक मानी जाती हैं। व्यापार आज भले ही गलाकाट प्रतियोगिता का दूसरा नाम बन चुका हो, लेकिन हमारे देश में ऐसे लोग भी रहे हैं, जिन्होंने व्यापार में भी उच्च सनातन मूल्यों को अपनाया, जिससे समाज का हित हो सके। ऐसे ही एक उद्योगपति थे जयदयाल डालमिया। डालमिया समूह के संस्थापक जयदयाल डालमिया के जीवन मूल्यों और आदर्शों के बारे में बता रहे हैं उनके पुत्र श्री रघु हरि डालमिया।
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यह भी देखें-
उद्योगपति जय हरि डालमिया के निधन की सूचना, समाज के लिए एक उदाहरण- • उद्योगपति जय हरि डालमिया के निधन का संदेश,...
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