सत्यपुरुष... सत्यपुरुष...अलख अपारा, अगम अनंत,तेरी ज्योति में हंसा हो संत॥
PANDIT INVEST
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सत्यपुरुष... सत्यपुरुष...अलख अपारा, अगम अनंत,तेरी ज्योति में हंसा हो संत॥
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तन पर उनके दिव्य वस्त्र हैं,
जैसे प्रकाश की धार।
सूरज, चंदा, अगणित हीरे,
जड़ दिए हों हजार॥