Karni mata chirja।।मेहाई म्हारो चित चरणा मे लिज्यो।।स्वर- विशाल जी कवीया रचना-पारस जी कवीया
विरेंद्र सिंह करणी शरणम
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Karni mata chirja।।मेहाई म्हारो चित चरणा मे लिज्यो।।स्वर- विशाल जी कवीया रचना-पारस जी कवीया
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विरेंद्र सिंह करणी शरणम
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कवी के मन की बहुत ही सुन्दर अभिलाषा जिसे उन्होने शब्दो को रूप दिया है। बहुत ही भावपूर्ण रचना
स्वर-विशाल जी कवीया
रचना-पारस जी कवीया
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मैहाई म्हारो , चित्त चरणा में कीजे
अम्बे सब झूठ , कपट हर लीजे
मां म्हारो , चित चरणा में कीजे
1 - आप दरस बिना मात मैहाई , पल भी ना चैन लीरिजे
नित उठ दर्शन आप रा चाहुं , चाहे पाहन ही कर दिजे
मां - - - - - - - - - - - - - - -- - --- -- - -
2 - आंखडल्या दर्शण हित तरसे , नैण निरंतर भींजें
रसना रटत मां नाम आपरो , अब तो दर्शन दीजे
मां - - - - - - - - - - - - - -- - - - - - - - -
3 - जद आ देह मां छुटण लागे , आप निकट म्हारे रीजे
करणी नाम रहे घट भीतर , अंत में नाम लीरीजे
मां - - - - - - - - - - - -- - - - - - - - - - -
4 - औरन के तो बहुत आसरो , म्हारे तो आप कहींजे
पारस के मन आप बसो मां , ऐसी भक्ति देदिजे
मां - - - - - - - - - - - - - - - - -- - - - - -
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