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Karni mata chirja।।मेहाई म्हारो चित चरणा मे लिज्यो।।स्वर- विशाल जी कवीया रचना-पारस जी कवीया

विरेंद्र सिंह करणी शरणम

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Karni mata chirja।।मेहाई म्हारो चित चरणा मे लिज्यो।।स्वर- विशाल जी कवीया रचना-पारस जी कवीया

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विरेंद्र सिंह करणी शरणम
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कवी के मन की बहुत ही सुन्दर अभिलाषा जिसे उन्होने शब्दो को रूप दिया है। बहुत ही भावपूर्ण रचना स्वर-विशाल जी कवीया रचना-पारस जी कवीया -- - - - - - - 🌷🌹🌷 - - - - - - मैहाई म्हारो , चित्त चरणा में कीजे अम्बे सब झूठ , कपट हर लीजे मां म्हारो , चित चरणा में कीजे 1 - आप दरस बिना मात मैहाई , पल भी ना चैन लीरिजे नित उठ दर्शन आप रा चाहुं , चाहे पाहन ही कर दिजे मां - - - - - - - - - - - - - - -- - --- -- - - 2 - आंखडल्या दर्शण हित तरसे , नैण निरंतर भींजें रसना रटत मां नाम आपरो , अब तो दर्शन दीजे मां - - - - - - - - - - - - - -- - - - - - - - - 3 - जद आ देह मां छुटण लागे , आप निकट म्हारे रीजे करणी नाम रहे घट भीतर , अंत में नाम लीरीजे मां - - - - - - - - - - - -- - - - - - - - - - - 4 - औरन के तो बहुत आसरो , म्हारे तो आप कहींजे पारस के मन आप बसो मां , ऐसी भक्ति देदिजे मां - - - - - - - - - - - - - - - - -- - - - - - रचना या चेनल के सम्बंध में कोई भी सुझाव 9511590107 पर सम्पर्क कर दे🙏🙏