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सम्यग्दृष्टि के आठ अंग का संक्षेप भावार्थ के अनुसार SS 582 05-11-26 समयसारवैभव 10 G-236

jinvani sarita pravah (Pradeep Manoria)

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सम्यग्दृष्टि के आठ अंग का संक्षेप भावार्थ के अनुसार SS 582 05-11-26 समयसारवैभव 10 G-236

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jinvani sarita pravah (Pradeep Manoria)
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प्रभावना का वास्तविक भाव -मर्म आपको यह स्वाध्याय निज हित के लिए उपयोगी लगी हो तो इस क्रम की स्वाध्याय का लाभ लेने हेतु चैनल को सब्सक्राइब कीजिये बेल आइकॉन को प्रेस कीजिये पूज्य गुरुदेव श्री के श्री समयसार ग्रन्थ पर हुए १५ वी बार के प्रवचन आधार से हुई स्वाध्याय श्रंखला के प्रवचन सुनने के लिए निम्न प्लेलिस्ट से सुनिए    • ज्ञानी अनिच्छुक है पुण्य पाप असन पान आदि क...