RSTV Special - India Post: Post Office Saving Bank | डाकघर बचत बैंक | Episode - 04
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बैकिंग क्षेत्र में हुई तमाम क्रांति और बहुत सी चुनौतियों के बाद भी भारत के डाकघर देश में बचत का सबसे अहम जरिया बने हुए हैं। खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में इनकी व्यापक विश्वसनीयता और नेटवर्क के नाते उनकी मजबूत स्थिति बरकरार है। वास्तव में शाखाओं के हिसाब से यह दुनिया का सबसे बड़ा बैंक 1 अप्रैल, 1882 को जब स्थापित हुआ तो बहुत से लोगो ने बैंक देखा तक नहीं था। डाकघरो में 11 तरह के खाते हैं जो हर आयु और आय वर्ग की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन हैं। भारतीय डाक को राष्ट्रीय बचत योजनाओं से सबसे ज्यादा राजस्व भी मिल रहा है। तमाम चुनौतियों के बाद भी डाकघऱ बचत बैंक के खातों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2007 में जहां 17.55 करोड़ खाते थे वे आज बढ़ कर 37.12 करोड़ हो गए हैं। इस बीच में भारतीय डाक ने जहां अपने डाकघरों का चेहरा बदला है वहीं कोर बैंकिंग से लेकर एटीएम और आधुनिकीकरण की दिशा में तमाम काम किए हैं। भारत के कई हिस्सों में राज्य सभा टीवी की जमीनी पड़ताल बताती है कि आज भी आम आदमी बैकिंग के क्षेत्र में भारतीय डाक पर सबसे अधिक भरोसा कायम रखे हुए है। राज्य सभा टीवी की विशेष सीरीज भारतीय डाक की चौथी कड़ी।
एंकर और अनुसंधान- अरविंद कुमार सिंह, प्रस्तुति-ममता सिद्धार्थ, वीडियो संपादन-रमाशंकर