पूरे चांद की रात//कृष्ण चंदर की लिखी कहानी//Poore Chand ki Raat//story written by Krishn Chander
सरितसागर
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पूरे चांद की रात//कृष्ण चंदर की लिखी कहानी//Poore Chand ki Raat//story written by Krishn Chander
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कृष्ण चंदर (कृश्न चंदर) हिंदी और उर्दू के प्रसिद्ध कथाकार और उपन्यासकार थे। उनका जन्म 23 नवंबर 1914 को भरतपुर (राजस्थान) में हुआ था और उनका निधन 8 मार्च 1977 को मुंबई (महाराष्ट्र) में हुआ। [1, 2, 3]
जीवन परिचय एवं शिक्षा
जन्म व परिवार: उनका जन्म 23 नवंबर 1914 को भरतपुर में हुआ था। उनके पिता गौरी शंकर चोपड़ा एक मेडिकल अफ़सर थे। उनका बचपन और शुरुआती जीवन तत्कालीन रियासत पुंछ (कश्मीर) और पंजाब के क्षेत्रों में बीता। [1, 2, 3]
शिक्षा: उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा महेंद्रगढ़ से प्राप्त की। उन्होंने लाहौर के फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। [1]
कार्यक्षेत्र: उन्होंने मुख्य रूप से उर्दू में लिखना शुरू किया और बाद में हिंदी में भी रचनाएं कीं। वे प्रगतिशील लेखक संघ से गहराई से जुड़े रहे। उन्होंने फिल्मों के लिए पटकथाएँ और आकाशवाणी के लिए नाटक भी लिखे। [1, 2, 3]
प्रमुख रचनाएं
उपन्यास: 'शिकस्त', 'एक गधे की आत्मकथा', 'दिल की वादियां सो गईं' आदि। [1, 2]
कहानी संग्रह: 'अन्नदाता', 'नज़्ज़ारे', 'हम वहशी हैं', 'जामुन का पेड़' (प्रसिद्ध व्यंग्य), 'कालू भंगी' आदि। [1, 2]
सम्मान व पुरस्कार
सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार (1966)
पद्म भूषण - भारत सरकार द्वारा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में 1969 में सम्मानित किया गया। [1, 2]