Dina Nath ‘Nadim’s - Soun Wattan By Harmonies Choir of J&K | Harivansh Rai Bachchan
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Dina Nath ‘Nadim’s - Soun Wattan By Harmonies Choir of J&K | Harivansh Rai Bachchan
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Harmony India Presents “Soun Wattan” ~ A message of Peace, Love & Togetherness
Music Composed and Conducted by Saurabh Zadoo.
Song Name: Soun Wattan (Kashmiri Language)
This song has been written by the legendary poet of J&K State Sh. Dina Nath Nadim Ji and transcribed into Hindi by Sh. Harivansh Rai Bachchan Ji.
Sung and Performed by Indian Harmonies Choir: Vanshika Bhat, Upasana Pandita, Sagar Koul, Himanshi Raina, Chhavi Koul, Vani Bhat, Sanna Bhat, Bhavik Pandita
Additional Music Arrangements by Sarang Ahuja
Rabab, Matka, Sarangi- Abdul Rashid Shah
Kashmiri Vocals Performed By Noor Mohammad, Ghulam Mohammad Shah, Abdul Rashid Shah, Shabir Ahmed Mir, Nisar Ahmed, Shabir Ahmed Shah.
Pictures by Anmol Kachroo
Edited by Akanksha Zadoo
Recorded at Harmony India Studio, Delhi.
हमारा वतन
हरिवंश राय बच्चन
वतन हमारा एक विहस्ता फूल है,
वह बहार है जिस पर जोबन आ गया,
खुशी, की जो देती तन को देती जामा नया,
यहाँ कमलों से निकलती हुई सुगंध है,
उसके दिल में प्रेम कहानी बन्द है,
यौवन की वह पहली प्यारी भूल है।
वतन हमारा महकदार गुलज़ार है ,
खिलते फूलों के गालों सा लाल है,
बचपन की मुस्कानों सा खुशहाल है,
अभी-अभी जो फूट पड़ा वह गीत है,
नौजवान के पागल मन की प्रीत है
वतन हमारा बलपने का यार है
वतन हमारा महकदार गुलज़ार है।
वतन हमारा है आँखों की रोशनी,
बर-खोजी बाबुल का सोने का डाला,
उषा की नवज्योती की यौवन की कला,
गोद लिया बन्ध्या का बेटा लाड़ला,
वह आशा है जो पूरे होने को बनी,
वतन हमारा है आँखों की रोशनी।
वतन हमारा एक सुनहरा गांव है,
थके मुसाफिर को चिनार की छांव है,
डलके तट पर उतरी सुंदर शाम है,
फला पेड़ पर वह पहला बादाम है,
फल मेवों की टोकरियां लाने वाले,
मामाजी के आने का पैग़ाम है,
माँ के आँचल में ममता का भाव है,
वतन हमारा एक सुनहरा गांव है।
वतन हमारा जैसे जामवार है,
चतुर सुई से कढ़ी केसरी क्यारियाँ,
कोमल जैसे हों रेशम की सारिया,
तूश की जिसपर लगी रुपहली धारियाँ,
खुदी लकड़ियों पर बचपन की मूरतें,
हुई न जिनके मन की ऐसी सूरतें, वतन हमारा इन सबका आकार है,
वतन हमारा जैसे जामवार है।
हम अपनी धरती के पहरेदार हैं,
जम्मू, पुंछ, लद्दाख और कश्मीर के म,
हम जो कहलाते हैं बेटे वीर के,
डाल हमारी हिम्मत बल तलवार है,
कुन्द न होती जिसकी पैनी धार है,
कहीं ज़िंदगी ने भी मानी हार है,
इसके मुँह लगना बिल्कुल बेकार है,
हम सब लड़ने मरने को तैयार हैं,
हम अपनी धरती के पहरेदार हैं।
शब्द लल्ल के साथ हमारे आज हैं,
हब्बा-खातूं की छाती की तान भी,
जीवन का जो भेद बताये, ज्ञान भी,
नए हमारे कंठस्थल में राग हैं,
नयी बहारों से लहराते बाग हैं,
हाथ हमारे आज नये ही साज हैं,
शब्द लल्ल के साथ हमारे आज हैं।
एक नया आदर्श हमारे पास है,
हमने भारत भर का पाया प्यार है,
मिली वितस्ता से गंगा की धार है,
सत्य और संकल्प हमारा एक है,
हिमगिरि के घन तुहीन कणों की छाँव में,
आज हमारी मिट्टी का अभिषेक है,
आज प्रेम के सागर में उल्लास है,
एक नया आदर्श हमारे पास है।
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