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चमत्कारी मातेश्वरी तनोट राय जो करती आ रही है सालों से भारतीय सरहद की रक्षा | 4K | दर्शन 🙏

Tilak Darshan

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चमत्कारी मातेश्वरी तनोट राय जो करती आ रही है सालों से भारतीय सरहद की रक्षा | 4K | दर्शन 🙏

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Tilak Darshan
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भक्तों नमस्कार! प्रणाम! सादर नमन और अभिनन्दन....भक्तों हमारे देश की धरती का हर कण, हर क्षण रहस्यों से भरा हुआ है... वो रहस्य आज भी देश के लाखों लाख मंदिरों में ईश्वरीय चमत्कार स्वरूप में दृष्टिगोचर होते हैं जो न केवल जनसामान्य को रोमांचित करते बल्कि अपने चमत्कारों के समक्ष श्रद्धा और भक्ति से नतमस्तक होने को विवश भी करते हैं। ऐसा ही चमत्कारिक और रहस्यमई मंदिर है मरुभूमि राजस्थान के जैसलमेर में...जिसके आसपास खतरनाक से खतरनाक बम भी निष्क्रिय और बेअसर हो जाते हैं।भक्तों! हम बात कर रहें हैं जैसलमेर जिले के थार रेगिस्तान स्थित तनोट माता मंदिर की... जिन्हे तनोट राय, युद्धवाली देवी और आवड़ माता के नाम से जाना जाता है। मंदिर के बारे में: भक्तों तनोट माता का मंदिर जैसलमेर से लगभग 120 किलोमीटर दूर भारत पाकिस्तान की सरहद के पास तनोट गांव में स्थित है। तनोट माता का मंदिर पूरे देश भर में प्रसिद्ध है। तनोट के अंतिम राजा भाटी तनुराव जी ने विक्रम संवत 847 में तनोट गढ़ की नींव रखी तथा विक्रम संवत 888 में तनोट दुर्ग और तनोट मंदिर की स्थापना करवाई। तनोट माता का प्राकट्य: भक्तों जनश्रुतियों तथा मंदिर के प्रवेश द्वार के पास लगे एक शिलालेख के अनुसार- भगवती श्री आवड़ देवी (माता तनोट राय) का जन्म, माता श्री हिंगलाज के वरदान स्वरूप, माड़ प्रदेश (जैसलमेर राज्य) चेलक निवासी, मामडियाजी की प्रथम संतान के रूप में विक्रम संवत 808 चेत्र सुदी नवमी मंगलवार को हुआ। इनके बाद भगवती के 6 बहनें जन्मी, जिनके नाम क्रमशः आशी, सेसी, गेहली, होल, रूप व लांग था। भक्तों कहते हैं अपने अवतरण के पश्चात भगवती आवड़ जी अपने चमत्कारिक कार्यों के चलते नागणेची, काले डूंगरराय, भोजासरी, देगराय, भादरिया राय, तेमड़ेराय व तनोटराय के नाम से प्रसिद्ध हुईं। तनोट मंदिर का इतिहास: भक्तों जब सन 1965 में भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। तब पाकिस्तान की तरफ से तनोट गाँव में भयंकर बमवारी हुई। पाकिस्तान ने तनोट राय मंदिर तथा आसपास लगभग 3 हजार बम बरसाए थे। जिनमें से 450 गोले मंदिर परिसर में गिरे किंतु एक भी बम फटा नहीं और मंदिर को खरोंच भी नहीं आई। इसी प्रकार 1971 में भारत-पाक युद्ध में भी, तनोट माता की कृपा से, भारतीय फौजियों ने शत्रु के सैकड़ों टैंक व गाड़ियां नष्ट कर दिये और शत्रु दुम दबाकर भागने को विवश हो गये। तबसे माता श्री तनोट राय भारतीय सैनिकों व सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र बन गईं हैं। इसीलिए वर्ष 1965 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने यहां चौकी स्थापित कर इस मंदिर की पूजा अर्चना व व्यवस्था का कार्यभार संभाला। वर्तमान में मंदिर का प्रबंध संचालन एक बीएसएफ (BSF) ट्रस्ट द्वारा किया जाता है साथ ही समय-समय पर मंदिर में निर्माण कार्य भी किया जाता है। जब किसी सैनिक या भारतीय सेना के जवान की तैनाती इस क्षेत्र में होती है तो सबसे पहले वो मंदिर में आकर तनोट माता के समक्ष अपनी उपस्थिती दर्ज करवाते हैं तनोट माता का दर्शन पूजन करते हैं, आशीर्वाद ग्रहण करते हैं तत्पश्चात अपनी ड्यूटी ज्वाइन करते हैं। भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! 🙏 इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। 🙏 Credits: संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल लेखक - रमन द्विवेदी Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #devotional #mandir #hinduism #tanotmatamandir #travel #vlogs #jaisalmer #rajasthan #Tilak #Darshan #HinduTemples #Sanatan #MustWatch #IndianTemples