Jagjit Singh Ji - Yeh Na Thi Hamari Kismat Live -
Ghazal For Soul
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Jagjit Singh Ji - Yeh Na Thi Hamari Kismat Live -
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Jagjit Singh Ji Live Yeh Na Thi Hamari Kismat
#Jagjitsingh #GhazalMirzaGalib
ये न थी हमारी क़िस्मत, के विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इन्तिज़ार होता
(विसाल-ए-यार = प्रियतम से मिलन)
तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर ऐतबार होता
(ऐतबार = विश्वास)
ये कहाँ की दोस्ती है, के बने हैं दोस्त, नासेह
कोई चारासाज़ होता, कोई ग़मगुसार होता
(नासेह = उपदेशक), (चारासाज़ = उपचारक, चिकित्सक), (ग़मगुसार = हमदर्द, दुःख बंटानेवाला)
कहूँ किससे मैं कि क्या है, शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता
(शब-ए-ग़म = ग़म की रात)
कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीमकश को
ये ख़लिश कहाँ से होती, जो जिगर के पार होता
(तीर-ए-नीमकश = आधा खिंचा हुआ तीर, कमज़ोर तीर), (ख़लिश = चुभन, वेदना)
ये मसाईल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब'
तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख़्वार होता
(मसाइल-ए-तसव्वुफ़ = सूफियाना भेद, भक्ति की समस्याएँ), (बयान = वर्णन), (वली = पाक इंसान, ऋषि, मुनि), (
बादा-ख़्वार = शराबी)
-मिर्ज़ा ग़ालिब