Woh Kaghaz Ki Kashti
गीतिकी
0:00 / 0:00
Woh Kaghaz Ki Kashti
84 694 просмотра · 9 дн. назад
गीतिकी
978 подписчиков
84 694 просмотра · 9 дн. назад
प्रस्तुत है एक बेहद ख़ूबसूरत और भावपूर्ण ग़ज़ल — “वो कागज़ की कश्ती”, जिसे अपनी दिलकश आवाज़ में गाया है जगजीत सिंह ने। सुदर्शन फ़ाकिर के संवेदनशील शब्दों और जगजीत सिंह की मधुर धुन ने इस ग़ज़ल को बचपन की यादों और बीते हुए सुनहरे पलों का एक अमर एहसास बना दिया है।
🎶 गीत: वो कागज़ की कश्ती
🎤 गायक: जगजीत सिंह
🎼 संगीतकार: जगजीत सिंह
✍️ गीतकार: सुदर्शन फ़ाकिर
🎵 सह-गायिका: चित्रा सिंह (मूल युगल प्रस्तुति में)
बचपन की बारिश, कागज़ की नावें, नानी की कहानियाँ और बेफ़िक्र ज़िंदगी — कुछ यादें ऐसी होती हैं, जिन्हें दौलत और शोहरत से भी वापस नहीं पाया जा सकता। यह ग़ज़ल हमें उस मासूम दुनिया में ले जाती है, जहाँ छोटी-छोटी खुशियाँ ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत हुआ करती थीं।
आपके बचपन की सबसे प्यारी याद कौन-सी है? इस ग़ज़ल को सुनकर अपने अनुभव और यादें कमेंट में ज़रूर साझा करें।
ऐसी ही सदाबहार ग़ज़लों, पुराने गीतों और हिंदी संगीत की अनमोल धरोहर का आनंद लेने के लिए हमारे YouTube चैनल गीतिकी को सब्सक्राइब करें।
#WohKagazKiKashti #JagjitSingh #ChitraSingh #SudarshanFaakir #गीतिकी #वोकागज़कीकश्ती #जगजीतसिंह #चित्रासिंह #ग़ज़ल #पुरानीग़ज़लें #बचपनकीयादें #सदाबहारगीत #HindiGhazal #OldGhazals #EvergreenSongs