जब संसार नहीं था, तब आत्मा कहाँ थी? | अष्टावक्र का सबसे बड़ा रहस्य |अंदर का राम
Andar Ka राम
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जब संसार नहीं था, तब आत्मा कहाँ थी? | अष्टावक्र का सबसे बड़ा रहस्य |अंदर का राम
जब इस संसार का अस्तित्व नहीं था, तब आत्मा कहाँ थी? क्या आत्मा का भी कोई आरंभ है? और यदि हमारा शरीर, विचार तथा पहचान लगातार बदलते रहते हैं, तो हमारा वास्तविक स्वरूप क्या है?
ये ऐसे प्रश्न हैं, जो मनुष्य को बाहरी संसार से भीतर की यात्रा की ओर ले जाते हैं।
इस वीडियो में हम महर्षि अष्टावक्र के अद्वैत दर्शन के माध्यम से आत्मा, शरीर, संसार, समय और स्वयं की वास्तविक पहचान को समझने का प्रयास करेंगे।
राजा जनक के प्रश्न से शुरू होने वाली यह यात्रा हमें विचार करने के लिए प्रेरित करती है कि क्या हम केवल अपने शरीर और मन तक सीमित हैं, या अपने अस्तित्व को समझने के लिए हमें एक अलग दृष्टि की आवश्यकता है।