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समाधि भक्ति – संस्कृत (स्तोत्र Series17) | आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी कृत | समाधिमरण एवं आत्मशुद्धि

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समाधि भक्ति – संस्कृत (स्तोत्र Series17) | आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी कृत | समाधिमरण एवं आत्मशुद्धि

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समाधि भक्ति (संस्कृत) | आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी (देवनन्दि) कृत | आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का पावन मार्ग 🙏 इस भक्तिमय प्रस्तुति में आप श्रवण करेंगे "समाधि भक्ति", जो जैन धर्म की एक अत्यंत पवित्र एवं आध्यात्मिक रचना है। इस महान कृति को आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी (देवनन्दि) द्वारा रचित माना जाता है। इसमें आत्मा की निर्मलता, वैराग्य, शांति, समता और परम कल्याण की भावनाओं का सुंदर वर्णन मिलता है। जैन दर्शन में समाधिमरण एक ऐसी आध्यात्मिक साधना है जिसमें साधक जीवन के अंतिम समय में मोह, राग-द्वेष और कषायों से ऊपर उठकर शांत मन एवं समभाव के साथ आत्मस्वरूप का चिंतन करता है। यह साधना आत्मसंयम, वैराग्य और मोक्षमार्ग की भावना को प्रबल करती है। ✨ समाधि भक्ति के मुख्य आध्यात्मिक संदेश: • आत्मा के वास्तविक स्वरूप का चिंतन • मन की शांति और समता भाव की साधना • मोह एवं कषायों से दूर रहने की प्रेरणा • वैराग्य और आत्मकल्याण की भावना • जिनेन्द्र भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा • संयम और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का संदेश 🎧 इस वीडियो में आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी कृत समाधि भक्ति का संस्कृत पाठ श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत किया गया है। यह पवित्र पाठ स्वाध्याय, ध्यान, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरणा प्रदान करता है। 🙏 आइए, समाधि भक्ति के दिव्य भावों का श्रवण और मनन करें तथा आत्मशांति एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ें। यदि यह जैन आध्यात्मिक प्रस्तुति आपको पसंद आए तो वीडियो को Like करें, अपने प्रियजनों के साथ Share करें और MantraAaradhna चैनल को Subscribe करें। #समाधिभक्ति #JainBhakti #PujyapadSwami #JainStotra #JainDharma #SamadhiMaran #SanskritStotra समाधि भक्ति, समाधि भक्ति संस्कृत, जैन समाधि भक्ति, आचार्य पूज्यपाद स्वामी, देवनन्दि कृत समाधि भक्ति, Jain Samadhi Bhakti, Samadhi Bhakti Sanskrit, Pujyapad Swami Stotra, समाधिमरण जैन, सल्लेखना, जैन धर्म, जैन भक्ति, संस्कृत स्तोत्र, आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन, वैराग्य भावना, समता भाव, मोक्षमार्ग, जिनेन्द्र भगवान।