श्रीकामाख्या सम्पूर्ण शरीर संचालन स्तोत्रम् | सम्पूर्ण शरीर में चेतना, प्राणशक्ति एवं आरोग्य हेतु
उद्दंड मार्तंड 𝑼𝒅𝒅𝒂𝒏𝒅 𝑴𝒂𝒓𝒕𝒂𝒏𝒅
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श्रीकामाख्या सम्पूर्ण शरीर संचालन स्तोत्रम् | सम्पूर्ण शरीर में चेतना, प्राणशक्ति एवं आरोग्य हेतु
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॥ श्रीकामाख्या सम्पूर्ण शरीर संचालन स्तोत्रम् ॥
इस वीडियो में प्रस्तुत है श्रीकामाख्या सम्पूर्ण शरीर संचालन स्तोत्रम्, जिसमें मंगलाचरण, ध्यान, विनियोग, ऋष्यादि न्यास, करन्यास, अङ्गन्यास, अर्गला, कीलक, कुञ्जिका, स्तोत्र एवं फलश्रुति सम्मिलित हैं।
यह स्तोत्र भगवती कामाख्या की उपासना के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर में प्राणशक्ति, चेतना, उत्साह तथा दिव्य ऊर्जा के स्मरण और आध्यात्मिक साधना के लिए प्रस्तुत किया गया है।
इस वीडियो में
श्रीकामाख्या सम्पूर्ण शरीर संचालन स्तोत्रम्
सम्पूर्ण पाठ
पाठ विधि
न्यास सहित
फलश्रुति।
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॥ श्रीकामाख्यासम्पूर्णशरीरसंचलनस्तोत्रम् ॥
ॐ
॥ मंगलाचरण ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कामाख्यायै नमः।
कामरूपनिलयां देवीं सर्वशक्तिस्वरूपिणीम्।
चेतनाप्राणसञ्चारदां वन्दे कामाख्यां पराम्बिकाम्॥
॥ ध्यानम् ॥
रक्ताम्बरधरां देवीं रक्तपद्मासनोपरी।
वराभयकरां सौम्यां सर्वाङ्गस्पन्ददायिनीम्।
त्रिनेत्रां मन्दहासाढ्यां नानारत्नविभूषिताम्।
भजे कामाख्यां जननीं प्राणचैतन्यवर्धिनीम्॥
॥ विनियोगः ॥
ॐ अस्य श्रीकामाख्यासम्पूर्णशरीरसंचलनस्तोत्रस्य परमशक्तिः ऋषिः। अनुष्टुप् छन्दः। श्रीकामाख्या देवता। ऐं बीजम्। ह्रीं शक्तिः। श्रीं कीलकम्। सम्पूर्णशरीरसंचलनसिद्ध्यर्थे, प्राणबलवृद्ध्यर्थे, आरोग्यसमृद्ध्यर्थे, भक्त्या जपे विनियोगः॥
॥ ऋष्यादिन्यासः ॥
ॐ परमशक्तये ऋषये नमः शिरसि।
अनुष्टुप्छन्दसे नमः मुखे।
श्रीकामाख्यादेवतायै नमः हृदि।
ऐं बीजाय नमः गुह्ये।
ह्रीं शक्तये नमः पादयोः।
श्रीं कीलकाय नमः सर्वाङ्गे॥
॥ करन्यासः ॥
ॐ ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ श्रीं मध्यमाभ्यां नमः।
ॐ ऐं अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ श्रीं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः॥
॥ अङ्गन्यासः ॥
ॐ ऐं हृदयाय नमः।
ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा।
ॐ श्रीं शिखायै वषट्।
ॐ ऐं कवचाय हुं।
ॐ ह्रीं नेत्रत्रयाय वौषट्।
ॐ श्रीं अस्त्राय फट्॥
॥ अर्गला ॥
कामाख्ये करुणापूर्णे देहि मे प्राणचेष्टितम्।
सर्वाङ्गेषु सदाशक्तिं प्रसादं कुरु पार्वति॥
॥ कीलकम् ॥
गुह्यशक्तिप्रबोधेन हृदयग्रन्थिभेदनम्।
त्वत्प्रसादान्महादेवि कीलकं विमलं भवेत्॥
॥ कुञ्जिका ॥
ऐं ह्रीं श्रीं कामाख्ये देवि प्रबोधय मम चेतसम्।
देहप्राणमनोबलं प्रस्फुरत्वनिशं शुभे॥
॥ स्तोत्रम् ॥
जय कामाख्ये जगन्माते प्राणधारिणि शाश्वति।
त्वदनुग्रहतो देहे सञ्चरोतु परा गतिः॥
त्वमेव रक्तसञ्चारं त्वमेव बलदायिनी।
त्वमेव चेतनारूपा त्वमेवाङ्गप्रवर्तिनी॥
नाडीमार्गेषु ते शक्तिः सदा दीप्यतु निर्मला।
स्नायुमज्जास्थिसन्धीनां भव स्पन्दप्रदायिनी॥
हृदि बुद्धौ तथा प्राणे त्वदीयं दिव्यमीश्वरम्।
सर्वेन्द्रियेषु मे देवि जागरूकत्वमावह॥
यत्र जाड्यं यत्र क्लेशो यत्र देहे निरुत्सवः।
तत्र ते शक्तिधाराभिः पूर्णजीवनमावह॥
करपादमुखनेत्रेषु त्वदीयं तेज उज्ज्वलम्।
सञ्चरेत्सर्वदा मातः आरोग्यं सुखमेव च॥
भक्तवत्सले कामरूपे विश्वमङ्गलकारिणि।
सर्वाङ्गस्फूर्तिदात्री त्वं पालयस्व निरन्तरम्॥
॥ फलश्रुतिः ॥
यः श्रद्धया पठेन्नित्यं कामाख्यास्तोत्रमुत्तमम्।
तस्य देहे सदा स्फूर्तिः प्राणशक्तिर्विवर्धते।
आरोग्यं बलमुत्साहं चिरं तिष्ठति सर्वदा।
कामाख्याप्रीतिमाप्नोति शिवसायुज्यमश्नुते॥
॥ इति श्रीकामाख्यासम्पूर्णशरीरसंचलनस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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पाठ विधि
प्रातःकाल स्नानादि के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें।
दीपक एवं धूप अर्पित कर भगवती कामाख्या का ध्यान करें।
श्रद्धा, भक्ति और एकाग्रचित्त होकर सम्पूर्ण स्तोत्र का पाठ करें।
पाठ के अंत में माता कामाख्या से कल्याण एवं सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
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॥ जय माँ कामाख्या ॥
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