मन की 5 अशुद्धियाँ : शंकराचार्य
Shunya gyaan
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मन की 5 अशुद्धियाँ : शंकराचार्य
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Shunya gyaan
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00:00 परिचय
00:32 अध्याय 1 — मल
08:20 अध्याय 2 — विक्षेप
15:04 अध्याय 3 — संशय
21:26 अध्याय 4 — विपरीत भावना
27:59 अध्याय 5 — प्रमाद
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00:32 – अच्छे कर्म करने के बाद भी अहंकार कैसे पैदा होता है?
02:44 – पुण्य कर्म भी इंसान को जन्म-मृत्यु के बंधन में कैसे बाँधते हैं?
04:13 – सात्विक अहंकार क्या है और यह आध्यात्मिक साधना में कैसे छिपा रहता है?
08:20 – ध्यान में बैठने के बाद भी मन भटकता क्यों रहता है?
10:32 – शांति पाने की इच्छा भी मन का एक विक्षेप कैसे बन जाती है?
13:06 – अगर विचारों का रुकना मुक्ति है, तो बेहोशी में मुक्ति क्यों नहीं मिलती?
15:04 – “मैं ब्रह्म हूँ” जानने के बाद भी संदेह क्यों बना रहता है?
18:43 – आत्मज्ञान के लिए अनुभव जरूरी है या सत्य को समझना?
21:27 – आत्मज्ञान के बाद भी हम शरीर, नाम और अपनी भूमिकाओं को “मैं” क्यों मानते हैं?
27:59 – प्रमाद क्या है और अपने वास्तविक स्वरूप को भूलना ही वास्तविक मृत्यु क्यों कहा गया है?
वीडियो विवरण (Description)
मन की 5 अशुद्धियाँ: शंकराचार्य के अनुसार मुक्ति में बाधा | अद्वैत वेदांत
इस वीडियो में अद्वैत वेदांत की दृष्टि से उन पाँच अशुद्धियों पर चिंतन है जो मुक्ति के मार्ग में चुपचाप खड़ी रहती हैं। विवेकचूड़ामणि, वेदांतसार, पंचदशी और उपनिषदों के आलोक में हर अध्याय गहराई से खुलता है।
इस वीडियो में आप सुनेंगे:
मल: अच्छे कर्मों के भीतर छिपा सूक्ष्म कर्तापन और सात्त्विक अहंकार। पुण्य भी बंधन कैसे बन सकता है।
विक्षेप: ध्यान में उठने वाली शांति की चाह, साक्षीभाव का अहंकार, और निर्विचार अवस्था तथा आत्मज्ञान का फरक।
संशय: "मैं ब्रम हूँ" सुनकर भी भीतर का शक, आत्मा को जानने वाला कौन, और अनुभव की प्रतीक्षा।
विपरीत भावना: ज्ञान के बाद भी देहात्मबुद्धि का खिंचाव, अध्यास की जड़ें और निदिध्यासन।
प्रमाद: स्वरूप की विस्मृति, "बाद में" की आदत और सहज आत्मस्थिति।
इन सवालों के उत्तर भी मिलेंगे:
शंकराचार्य के अनुसार मुक्ति में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
क्या पुण्य कर्म भी जन्म-मरण का कारण बनते हैं?
ज्ञान समझ लेने के बाद भी पुरानी आदतें क्यों लौट आती हैं?
चूक सबसे पहले कहाँ होती है?
यह वीडियो उन साधकों के लिए है जो अद्वैत वेदांत, आत्मज्ञान और मोक्ष को गहराई से समझना चाहते हैं।
ये मेरे अपने चिंतन हैं। कृपया इन्हें अपने अध्ययन और गुरु के मार्गदर्शन के साथ परखें।
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