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लगा कि सब खत्म हो गया, पता नहीं — उसके लिए प्यार अभी शुरू हुआ है।

शब्द की परछाई

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लगा कि सब खत्म हो गया, पता नहीं — उसके लिए प्यार अभी शुरू हुआ है।

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शब्द की परछाई
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गरीब कॉलेज छात्रा लिन तांग मुश्किल हालातों में अकेली पड़ जाती है। जब उसकी माँ उसके पैसे लेकर उससे रिश्ता तोड़ देती है, तब अपनी दादी के इलाज के लिए वह एक असामान्य समझौता स्वीकार करती है। वह कोमा में पड़े बो शुआनज़े से शादी करती है, बदले में मिलने वाली रकम से दादी का इलाज कराने की उम्मीद में। लेकिन बो शुआनज़े के होश में आते ही वह लिन तांग को ठुकराकर घर से निकाल देता है। अपनी सच्चाई छिपाकर वह डिलीवरी का काम करती है और अकेले अपने आने वाले बच्चे की जिम्मेदारी उठाती है। संयोग से दोनों फिर मिलते हैं, मगर वह उसे पहचान नहीं पाता। हालात बिगड़ने पर लिन तांग को मजबूर होकर उसी पति को फोन करना पड़ता है। उस एक कॉल में छिपे रिश्ते, अधूरे समझौते और बच्चे की सच्चाई सामने आने लगती है—क्या बो शुआनज़े सच जान पाएगा, और क्या उनकी किस्मत बदल सकेगी?