प्रेम माधुरी भारतेंदु हरिश्चंद्र की मधुर कविता | Hindi Kavita With Music | Prem Madhuri by Bhartendu
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प्रेम माधुरी भारतेंदु हरिश्चंद्र की मधुर कविता | Hindi Kavita With Music | Prem Madhuri by Bhartendu
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भारतेंदु हरिश्चंद्र की अमर प्रेम कविता ❤️ | Prem Madhuri | Hindi Poetry with Music
प्रेम माधुरी (हिंदी काव्य Chapter 1) व्याख्या भारतेंदु हरिश्चंद्र 12th Hindi, UP Board 2026
प्रेम माधुरी व्याख्या (पद्यांश आधारित प्रश्नोत्तर ) Prem Madhuri (हिंदी काव्य Chapter 1) व्याख्या
🎵 प्रेम माधुरी – भारतेंदु हरिश्चंद्र जी की कालजयी हिंदी कविता, जिसे हमने मधुर संगीत और भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ प्रस्तुत किया है। 🎵
💖 यह कविता हिंदी साहित्य में प्रेम की कोमलता, आत्मा की शुद्धता और भावनाओं की मिठास को दर्शाती है। इस वीडियो में आपको मिलेगा शब्दों का रस, भावों की गहराई और संगीत की मधुरता।
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गीत : प्रेम माधुरी
स्त्रोत : भारतेंदु ग्रंथावली
गायक : Voice-Over Arunesh , Edited Voice
रचनाकार :भारतेंदु हरिश्चंद
संपादक एवं निर्माता : The Gyansindhu
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(19) प्रेम माधुरी
मारग प्रेम को को समुझे 'हरिचन्द' यथारथ होत यथा है।
लाभ कछू न पुकारन में बदनाम ही होन की सारी कथा है।
जानत है जिय मेरौ भली बिधि औरु उपाइ सबै बिरथा है।
बावरे हैं ब्रज के सिगरे मोहिं नाहक पूछत कौन बिथा है।। 1 ।।
रोकहिं जो तौ अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइए।
जौ कहें जाहु न तौ प्रभुता जौ कछू न कहैं तो सनेह नसाइए।
जो 'हरिचन्द' कहैं तुमरे बिनु जीहैं न तो यह क्यों पतिआइए।
तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमें समझाइए।। 2 ।।
आजु लौं जौ न मिले तौ कहा हम तो तुमरे सब भाँति कहावें।
मेरौ उराहनो है कछु नाहिं सबै फल आपने भाग को पावें।
जो 'हरिचंद' भई सो भई अब प्रान चले चहैं तासों सुनावैं।
प्यारे जू है जग की यह रीति बिदा की समै सब कंठ लगावैं।। 3 ।।
व्यापक ब्रह्म सबै थल पूरन हैं हमहूँ पहचानती हैं।
पै बिना नंदलाल बिहाल सदा 'हरिचन्द' न ज्ञानहिं ठानती हैं।
तुम ऊधौ यहै कहियो उनसों हम और कछू नहिं जानती हैं।
पिय प्यारे तिहारे निहारे बिना अखियाँ दुखियाँ नहिं मानती हैं।।4।।
भारतेंदु हरिश्चंद
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