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Bhram Aur Karm | भ्रम और कर्म | Tera Bhram Aur Tera Karm | New Shiv Ji Song

Dabang Music

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Bhram Aur Karm | भ्रम और कर्म | Tera Bhram Aur Tera Karm | New Shiv Ji Song

357 просмотров · 2 мес. назад
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Bhram Aur Karm | Tera Bhram Aur Tera Karm | New Shiv Ji Song | भ्रम और कर्म जीवन का चक्र और कर्म का महत्व समझना क्यों जरूरी है? इस वीडियो में जानिए कि कैसे आप अपने भीतर ही सत्य की खोज कर सकते हैं। यह वीडियो उन लोगों के लिए है जो जीवन के अर्थ और कर्म फल के सिद्धांत को गहराई से समझना चाहते हैं। हम चर्चा करते हैं कि कैसे जीवन केवल साँसों का एक धागा मात्र है और कैसे हर व्यक्ति अपने कर्मों का भार लिए निरंतर आगे बढ़ रहा है। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य आपको यह समझाना है कि बाहर की दुनिया में भटकने के बजाय, सत्य को स्वयं के भीतर खोजना ही एकमात्र मार्ग है। जीवन का चक्र और कर्म का महत्व समझने से आपको अपने निर्णयों में स्पष्टता मिलेगी। जब आप यह जान लेते हैं कि कर्म का महत्व क्या है, तो आप जीवन के प्रति अपना दृष्टिकोण बदल सकते हैं। अंततः, सत्य की खोज ही वह प्रक्रिया है जो आपको जीवन के चक्र से मुक्ति का अनुभव कराती है। अपने भीतर झांकना शुरू करें और जीवन का अर्थ सही परिप्रेक्ष्य में देखें। आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन के दर्शन पर ऐसी ही गहरी चर्चाओं के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। आप अपने जीवन के अनुभव के बारे में क्या सोचते हैं? नीचे कमेंट में जरूर बताएं। #BhramAurKarm #PhilosophicalRap #SpiritualRap #HindiRap #Karma #Bhram Make Reels On Instagram Streaming On All Platforms Listen or Set Your Callertune Enjoy & Stay Connected With Us! ➟ Spotify - https://open.spotify.com/track/07DtyX... ➟ YouTube Music -    • भ्रम और कर्म   ➟ Apple Music -   / %e0%a4%ad-%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%...   ➟ Amazon Music - https://music.amazon.in/tracks/B0H9JT... Lyrics - तेरे मन का परदा हटा रहा हूँ, भ्रम के पीछे सत्य दिखा रहा हूँ। तेरे मन का परदा हटा रहा हूँ, कर्म का पूरा लेखा बता रहा हूँ। एक तरफ़ भ्रम, एक तरफ़ कर्म, बीच खड़ा मैं अपना धर्म निभा रहा हूँ। जो दिख रहा है, वो सत्य नहीं है, सच कहे मैं खुद को पहचान रहा हूँ। सोने की माया, मिट्टी का तन, तन कहे मैं रोज़ बिखर रहा हूँ। महलों के सपने आँखों में लेकर, वक़्त कहे मैं सबको बराबर कर रहा हूँ। नाम के पीछे भाग रहा जग, नाम कहे मैं पल में गुज़र रहा हूँ। कर्म की खेती जो आज बोई, भाग्य कहे मैं वही उभर रहा हूँ। जीवन एक धागा साँसों का, काल उसे धीरे उधेड़ रहा हूँ। भ्रम कहे मैं दुनिया सारी, ज्ञान कहे मैं भ्रम से लड़ रहा हूँ। रात से सुबह और सुबह से शाम, चक्र कहे मैं निरंतर घूम रहा हूँ। क्षण-क्षण कर्म का बीज गिरे, फल कहे मैं चुपचाप चुन रहा हूँ। चुन रहा हूँ... मुझे लगा मैं राजा बन बैठा, अहंकार कहे मैं तुझमें भर रहा हूँ। आईना बोला देख ज़रा खुद को, सच कहे मैं तुझे खबर कर रहा हूँ। मैंने सोचा सब मेरा-मेरा, सत्य कहे मैं भ्रम हर रहा हूँ। जो भी पाया यहीं रह जाएगा, शून्य कहे मैं सबको समेट रहा हूँ। कर्म तेरा साया बन चलता, हर कदम पर साथ सफ़र रहा हूँ। भाग न पाए कोई मुझसे, न्याय कहे मैं भीतर रहा हूँ। जब भी भीतर झाँका मैंने, भ्रम कहे मैं तुझमें ठहर रहा हूँ। खुद को ढूँढे जो खुद के अंदर, वो कहे मैं पार उतर रहा हूँ। एक तरफ़ भ्रम, एक तरफ़ कर्म, मैं दोनों का अर्थ समझ रहा हूँ। भ्रम में खोकर कर्म जो भूला, वो खुद से ही दूर बिखर रहा हूँ। कर्म मिले तो राह मिलेगी, सत्य कहे मैं दीप धर रहा हूँ। मैं कुछ भी नहीं, फिर सब कुछ हूँ, भ्रम कहे मैं खुद में भर रहा हूँ। भ्रम से ऊपर, कर्म के भीतर, स्वयं को स्वयं में कर रहा हूँ। ना कुछ लाया, ना कुछ ले जाऊँ, बस कर्मों का भार लिए चल रहा हूँ। भ्रम के बादल छँटते जाएँ, ज्ञान का सूरज उभर रहा हूँ। मेरे मन का... परदा हट रहा है, और कर्म का सार कह रहा हूँ। हाँ, मैं कह रहा हूँ... जी भर कह रहा हूँ... हाँ, मैं कह रहा हूँ... सच जी भर कह रहा हूँ। अगर आपको ये गाना पसंद आए तो LIKE 👍 करें और ऐसे ही spiritual Song के लिए SUBSCRIBE 🔔 करें