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श्रीमद्भगवद्गीता : अध्याय 3 : श्लोक 10-16 | कर्म, यज्ञ और सृष्टि का रहस्य | Bhagavad Gita

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श्रीमद्भगवद्गीता : अध्याय 3 : श्लोक 10-16 | कर्म, यज्ञ और सृष्टि का रहस्य | Bhagavad Gita

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॥ ॐ श्रीकृष्णाय नमः ॥ श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 3 : कर्मयोग | श्लोक 10–16 भगवान श्रीकृष्ण इन श्लोकों में यज्ञ, कर्म और प्रकृति के बीच के संबंध को समझाते हैं। प्रजापति ने यज्ञ की व्यवस्था क्यों की? देवता मनुष्य को क्या प्रदान करते हैं? अन्न → वर्षा → यज्ञ → कर्म का यह यज्ञचक्र क्या है? और केवल अपने लिए जीने वाले व्यक्ति के बारे में श्रीकृष्ण क्या कहते हैं? इस वीडियो में श्लोक 10–16 का सरल अर्थ और आध्यात्मिक संदेश समझेंगे। 🕉️ मुख्य संदेश: जीवन केवल लेने का नाम नहीं है। अपने कर्म को समर्पण, कर्तव्य और योगदान की भावना से करना ही यज्ञ का भाव है। अगले वीडियो में श्लोक 17–24 में जानेंगे कि ज्ञानी व्यक्ति कर्म क्यों करता है और स्वयं भगवान श्रीकृष्ण कर्म क्यों करते हैं। 🙏 राधे राधे। #BhagavadGita #KarmaYoga #Yajna #GeetaGyan #LordKrishna #Krishna #Arjuna #AdvaitaVedanta #Vedanta #SanatanDharma #Spirituality #NishkamKarma #Gita #BhagavadGitaHindi#mainkaunhoon#whoami