186.गाथा 145 मेरे में है स्व - पर को जानने की अचिंत्य शक्ति रूप सम्पत्ति।
Amit bhaiya ji Vidisha
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186.गाथा 145 मेरे में है स्व - पर को जानने की अचिंत्य शक्ति रूप सम्पत्ति।
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