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Sambhavnath Jin Stavan | Sambhav Te Dur Sevo Save Re | Anandghan Chovisi | With Lyrics and Subtitles

Ratnatrayam

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Sambhavnath Jin Stavan | Sambhav Te Dur Sevo Save Re | Anandghan Chovisi | With Lyrics and Subtitles

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Ratnatrayam
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Jainism Music is created to spread the unfamous literature of Jainism to the modern world. 00:00 - संगीत ( रचयिता - आनंदघनजी महाराज ) 00:22 - गाथा 1 संभवदेव ते धुर सेवो सवे रे, लही प्रभुसेवन भेद; सेवन कारण पहेली भूमिका रे, अभय अद्वेष अखेद. सं० १ 01:22 - गाथा 2 भय चंचलता हो जे परिणामनी रे, द्वेष अरोचक भाव; खेद प्रवृत्ति हो करतां थाकिये रे, दोष अबोध लखाव. सं० २ 02:50 - गाथा 3 चरमावर्त हो चरमकरण तथा रे, भवपरिणति परिपाक; दोष टळे वळी दृष्टि खूले भली रे, प्राप्ति प्रवचन-वाक. सं०३ 04:17 - गाथा 4 परिचय पातिक-घातिक साधुशुं रे अकुशल अपचय चेत; ग्रंथ अध्यातम श्रवण मनन करी रे, परिशीलन नयहेत. सं०४ 05:45 - गाथा 5 कारणजोगे हो कारज नीपजे रे, एमां कोई न वाद; पण कारण विण कारज साधिये रे, ए निज मत उन्माद. सं०५ 07:12 - गाथा 6 मुग्ध सुगम करी सेवन आदरे रे, सेवन अगम अनुप ; देजो कदाचित् सेवक याचना रे, आनंदघन रस रूप. सं०६