वीर वही | Rashmirathi Song | कर्ण–परशुराम | रामधारी सिंह दिनकर
Veer Ras Records
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वीर वही | Rashmirathi Song | कर्ण–परशुराम | रामधारी सिंह दिनकर
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“वीर वही है जो कि शत्रु पर जब भी खड्ग उठाता है,
मानवता के महागुणों की सत्ता भूल न जाता है।”
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रश्मिरथी के द्वितीय सर्ग पर आधारित “वीर वही” कर्ण और परशुराम के गुरु–शिष्य संबंध, युद्ध-नीति, धर्म और सच्ची वीरता को प्रस्तुत करने वाला एक सिनेमाई गीत है।
परशुराम कर्ण को समझाते हैं कि वास्तविक वीरता केवल शस्त्र उठाने या शत्रु को पराजित करने में नहीं, बल्कि शक्ति को मर्यादा में रखने और युद्ध के बीच भी मानवता को जीवित रखने में है।
जब कर्ण अपने धनुष-बाण का अद्भुत कौशल दिखाता है—एक ओर वन अग्नि से दहक उठता है और दूसरी ओर निर्झर की धारा फूट पड़ती है—तब परशुराम को उसमें अपनी वीरता, अपना तेज और अपनी परम्परा का भविष्य दिखाई देता है।
गुरु का आशीर्वाद पाकर कर्ण प्रण लेता है कि उसे प्राप्त शस्त्र-विद्या केवल धर्म और मानवता की रक्षा के लिए प्रयोग होगी।
आपके अनुसार सच्चे वीर की सबसे बड़ी पहचान क्या है? Comment में अपनी राय साझा करें।
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मूल काव्य: रश्मिरथी
कवि: रामधारी सिंह ‘दिनकर’
संगीत एवं दृश्य प्रस्तुति: Veer Ras Records
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