जन्म कुंडली में दांपत्य भाव के स्वामी का बारहों भाव में फल BY NARMDESHWAR SHASTRI [290]
PT. NARMDESHWAR SHASTRI
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प्रिय दर्शकों विवाह के बाद एक नया जीवन शुरू होता और जन्मकुंडली के सप्तम भाव को दाम्पत्य सुख का भाव कहा गया है | इस भाव के कारक शुक्र है, यदि कुंडली में सप्तम भाव पीड़ित हो सप्तमेश पाप ग्रह से दृष्ट हो तो वैवाहिक जीवन सुखद नहीं हो पता | वही सप्तम भाव में शुभ ग्रह हो तो दाम्पत्य जीवन सुखद होता है | और देखा जाये तो जिसका वैवाहिक जीवन सुखद है उसके लिए सबकुछ अच्छा है |
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