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श्री गुरु गोरखनाथ जी का दिव्य फटकार शाबर मंत्र

Mantra - Tantra - Yantra ( मंत्र - तंत्र - यंत्र )

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श्री गुरु गोरखनाथ जी का दिव्य फटकार शाबर मंत्र

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मंत्र तंत्र यंत्र चॅनेल मे आप सभी का स्वागत है आज मै आप सभी के लिए श्री गुरु गोरखनाथ जी का दिव्य फटकार शाबर मंत्र लेकर आया हु श्री गुरु गोरक्षनाथ जी का यह दिव्य फटकार मंत्र साधारण मंत्र नहीं है— यह वह शक्तिशाली ध्वनि है जो अदृश्य नकारात्मक ऊर्जाओं, बाधाओं, भूत-प्रेत, उपरी हवा और तांत्रिक रुकावटों को तुरंत नष्ट करने की क्षमता रखता है। जहाँ यह मंत्र बजता है, वहाँ किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति ठहर ही नहीं सकती। मंत्र की कंपन शक्ति आसपास के वातावरण को शुद्ध करती है, बुरी नज़र को काटती है और घर में सुरक्षा की एक अदृश्य ढाल बना देती है। गुरु गोरक्षनाथ की कृपा से यह मंत्र: मन से भय, चिंता और अदृश्य डर को समाप्त करता है आत्मविश्वास और साहस को कई गुना बढ़ाता है शत्रु बाधा, तांत्रिक प्रयोग और अनहोनी को नष्ट करता है अचानक आने वाली परेशानी, झगड़ा, मानसिक उलझन और तनाव को दूर करता है साधक के चारों ओर एक शक्तिशाली तेज-वलय (Aura Shield) बना देता है कहते हैं यह मंत्र हर किसी को सुनना नसीब नहीं होता। जिन्हें यह मंत्र सुनाई देता है, समझ लें कि गोरक्षनाथ जी ने स्वयं उनकी रक्षा का दायित्व लिया है। अगर आपके जीवन में कोई अनदेखी समस्या, अनहोनी या नकारात्मक ऊर्जा परेशान कर रही हो… तो यह मंत्र आपके लिए दिव्य कवच की तरह काम करेगा। प्रतिदिन श्रद्धा से सुनें, और अपनी आँखों से देखें कि कैसे नकारात्मकता आपके जीवन से पल-पल दूर होती जाती है। यह मंत्र मै आप सभी के लिए जाप करके दे रहा हु कृपया ऐसे प्रति दिन सुने और लाभले चॅनल को शेअर करे सबस्क्राईब करे इसी गुरुदक्षिणा की हम आपसे आशा करते है धन्यवाद श्री गोरक्ष फ़टकार मंत्र. सतनमो आदेश।श्री नाथजी गुरुजी को आदेश। ॐ गुरुजी उत्तर दिशा में श्री सदाशिव शम्भुजती गुरु गोरक्ष नाथ खड़ा। कानों कुण्डल काँधे झोली माथे चन्द्रमा सिर जटा। पगां खड़ाऊ गले रुद्राक्ष माला भगवा भेष हाथ खप्पर त्रिशूल चिमटा। गुरु गोरक्ष नाथ माया मछिन्द्रनाथ का चेला। जति सती की षटक्रिया देखें। तो सिद्धों के संग रहें। नहीं तो मढ़ी मसाण में फिरें अकेला। गुरु गोरक्ष नाथ हुंकारता आया। गाजता आया। घोरता आया।सिर की जटा बखेरता आया। और की चौकी उखाड़ता आया। अपनी चौकी बिठाता आया। और का किवाड़ तोड़ता आया। अपना किवाड़ भेड़ता आया। गौरी नन्द गणेश को उठाकर लाया। काली पुत्र काल भैरव को जगा कर लाया। अंजनी सुत हनुमान को पकड़ कर लाया। हज़रत मुहम्मद साहब को बाँध कर लाया। गुरु गोरक्षनाथ जी तुम्हारा जोग इक्कीस ब्रम्हाण्ड में बड़ा अपार। देव दानव तुम्हारें जोग से नवखण्ड धरती छोड़ भाग जाये पाताल। नगर खेड़ा बस्ती गाँव के देवी देवता थर्र थर्राये। सुलेमान पीर ,कमाल खां पठान औऱ मुल्ला मौलवी काजी तुर्क तो मक्का मदीना छोड़ पाताल में घुस जाये। ब्रम्ह हत्या और मुआ मुर्दा जलती चिता छोड़ धरती में धँस जाये। भूत प्रेत जिन्द औऱ राक्षस पिशाच घर बार छोड़ मढ़ी मसाण चौपटा में जाकर सो जाये। डाकिनी शाकिनी औऱ भूतनी प्रेतनी घट पिण्ड को त्याग बारह कोस दूर भाग जाये। बाँधी बाँधी।किस किस को बाँधी।देव दानव को बाँधी। उड़न्त गढ़न्त योगिनी महामारी चुड़ैल को बाँधी। हाट को बाँधी।घाट को बाँधी।मरघट को बाँधी। बाँधी बाँधी रे गढ़ गिरिनार के गुरु गोरक्ष नाथ पीर। संग चलें तेरें नवनाथ चौरासी सिद्ध औऱ बारह पंथो के बारह पीर। गुरु गोरक्ष नाथ आये। गुरु गोरक्ष नाथ जाये। गुरु गोरक्ष नाथ महादेव जी की डिब्बी में जाय समाये। गोरक्ष डिब्बी महादेव जी के पास पड़ी मढ़ी मसाण। महादेव जी ने गोरक्ष डिब्बी दीन्हीं गुरु के हाथ। गुरु ने गोरक्ष डिब्बी दीन्हीं हमारे हाथ। गोरक्ष डिब्बी जहाँ खाई वहाँ दबी। गोरक्ष डिब्बी गोरक्ष फ़टकार। पढ़कर मारूँ मंगलवार।काले उड़द गौरी राई। चौराहे की मिट्टी मढ़ी मसाण की विभुति माई। जिसको ये लगे वो कूदे नो नो ताल। जो नहीं लगे तो माया मछिन्द्रनाथ की करोड़ करोड़ दुहाई।अन्न जल को तरस जाये।गोबर खाये। विष्टा खाये।नीचे सिर ऊपर पैर कर कपड़े फाड़ जंगल में भाग जाये। फिर कर कभी नहीं देखें घर बार।भरमता फिरें दसों द्वार।शब्द साँचा पिण्ड काँचा। फुरे मन्त्र ईश्वर महादेव तेरी वाचा फिरै घट पिण्ड की रक्षा श्री त्रिपुर बाला सुन्दरी माई करें। इतना गोरक्ष फ़टकार मन्त्र जाप सम्पूर्ण भया। गोरक्ष टिल्ले पर गादी बैठ राजा भृतहरि ने राजा गोपीचन्द को पढ़ कथ कर सुनाया। श्री नाथजी गुरुजी को आदेश।आदेश।आदेश।