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माँ चंद्रघंटा की कहानी: काशी (वाराणसी) में क्यों प्रसिद्ध है यह धाम? | Day 3 Navratri

StoryLifeByKaran

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माँ चंद्रघंटा की कहानी: काशी (वाराणसी) में क्यों प्रसिद्ध है यह धाम? | Day 3 Navratri

3 просмотра · 11 дней назад
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बात उस समय की है जब असुरराज महिषासुर का अत्याचार तीनों लोकों में बढ़ चुका था। देवता भयभीत थे। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज़ से देवी दुर्गा प्रकट हुईं। जब भगवान शिव ने देवी को अपना त्रिशूल, श्री हरि ने चक्र और देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र अर्पित किए, तब देवी का तीसरा स्वरूप उभरा—माँ चंद्रघंटा। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा सुशोभित था। उनकी दस भुजाएं थीं और वे स्वर्ण के समान दमकती कांति के साथ सिंह पर सवार थीं। माँ के घंटे की भयंकर गर्जना से ही असुरों का हृदय कांप उठता था। कहा जाता है कि महिषासुर के सेनापतियों को नष्ट करने के बाद, जब ब्रह्मांड को दिव्य ऊर्जा और शांति की आवश्यकता हुई, तब माँ चंद्रघंटा ने भगवान शिव की नगरी काशी (वाराणसी) का रुख किया। काशी में स्थापित होकर माँ ने प्रतिज्ञा ली कि जो भी भक्त इस पावन नगरी में आएगा, माँ उसके भय, पाप और संकटों को अपने घंटे की दिव्य ध्वनि से भस्म कर देंगी। वाराणसी के चौक क्षेत्र में स्थित 'माँ चंद्रघंटा मंदिर' आज भी इस बात का साक्षी है। जब असुरों का अंतिम दल काशी की ओर बढ़ा, तो माँ चंद्रघंटा ने केवल अपने धनुष की टंकार और मस्तक के घंटे की भयंकर ध्वनि से ही राक्षसों का संहार कर दिया। Navratri के तीसरे दिन जो भी भक्त काशी के इस पावन दरबार में या अपने घर पर माँ चंद्रघंटा का ध्यान करता है, उसके जीवन से हर प्रकार का डर समाप्त हो जाता है और उसे परम शांति तथा साहस की प्राप्ति होती है। जय माँ चंद्रघंटा! जय बाबा विश्वनाथ! .#MaaChandraghanta #ChandraghantaMata #NavratriSpecial #NavratriDay3 #Day3Navratri #DurgaPuja #JaiMaaDurga #Navratri2026 #NavratriStatus #NavratriReels #NavratriVibes #DevotionalReels (Like Subscribe Comment Share)