कर्मयोगी वाचोनिधि आचार्य — 40 वर्षों की ऐतिहासिक सेवायात्रा
Arya Samaj Gandhidham
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कर्मयोगी वाचोनिधि आचार्य — 40 वर्षों की ऐतिहासिक सेवायात्रा
वेद प्रचार, समाज सेवा, शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर्मयोगी वाचोनिधि आचार्य की 40 वर्षों की अविराम सेवायात्रा समर्पण, त्याग, तपस्या और कर्मनिष्ठा की अनुपम गाथा है। सन् 1986 में आर्य समाज गांधीधाम की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने सीमित संसाधनों वाली संस्था को अपने दूरदर्शी नेतृत्व, अथक परिश्रम और निस्वार्थ सेवा के बल पर विश्व के आदर्श आर्य समाजों में प्रतिष्ठित किया।
उनके नेतृत्व में आर्य समाज गांधीधाम ने कांडला चक्रवात, 26 जनवरी 2001 के विनाशकारी कच्छ भूकम्प तथा दिसम्बर 2004 की सुनामी जैसी भीषण आपदाओं में अभूतपूर्व राहत, बचाव एवं पुनर्वास कार्य किए। भूकम्प के केवल तीन दिन बाद 'जीवन प्रभात' की स्थापना कर माता-पिता को खो चुके बच्चों को नया परिवार, शिक्षा, संस्कार और सुरक्षित भविष्य प्रदान किया। सन् 1998 में मेडिकल ऑक्सीजन बैंक की स्थापना कर जनसेवा का एक नया अध्याय लिखा तथा पुदुच्चेरी में भी 'जीवन प्रभात' की स्थापना कर लगभग तीन हजार किलोमीटर दूर रहकर उसके निर्माण और सफल संचालन का दायित्व निभाया।
सन् 2011 में उन्होंने अपने बैंक के प्रतिष्ठित एवं आकर्षक पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर स्वयं को पूर्णकालिक रूप से आर्य समाज गांधीधाम की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके मार्गदर्शन में आदिपुर में डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल तथा अंजार को उसका पहला सीबीएसई से संबद्ध अंग्रेजी माध्यम सहशिक्षा विद्यालय ओ.एम. डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल प्राप्त हुआ, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित किए। वर्ष 2014 में वे पहली बार आर्य समाज गांधीधाम के प्रधान निर्वाचित हुए। वर्तमान में वे गुजरात प्रान्तीय आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान के रूप में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्य समाज की विभिन्न गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यह वीडियो कर्मयोगी वाचोनिधि आचार्य की 14,610 दिनों की अविराम सेवायात्रा को हार्दिक अभिवादन है—एक ऐसी प्रेरक यात्रा, जिसने सेवा को साधना, संस्कार को शक्ति और संगठन को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया तथा आर्य समाज गांधीधाम को विश्व के आदर्श आर्य समाजों में विशिष्ट पहचान दिलाई।