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​माँ कूष्मांडा कथा और महत्व | Sharad Navratri Day 4 | कूष्मांडा माता की पावन कहानी

Hindi Katha Kahani

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​माँ कूष्मांडा कथा और महत्व | Sharad Navratri Day 4 | कूष्मांडा माता की पावन कहानी

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​शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के चौथे दिन जगत जननी माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की उपासना का विधान है। अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने के कारण इन्हें 'कूष्मांडा' कहा जाता है। ​माँ का स्वरूप: माता की अष्टभुजाएँ हैं, जिनमें वे कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा और जप माला धारण करती हैं। इनका वाहन सिंह (शेर) है। ​शुभ रंग: नवरात्रि के चौथे दिन का विशेष रंग हरा (Green) है, जो हरियाली, प्रकृति, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान इस रंग के वस्त्र पहनना या इस रंग को महत्व देना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। ​पूजा का महत्व: माँ कूष्मांडा की आराधना करने से भक्तों के सभी रोग, शोक और भय दूर होते हैं। इनकी कृपा से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है और साधक को अनाहत चक्र जागृत करने की सिद्धि प्राप्त होती है। ​इस वीडियो में सुनें माँ कूष्मांडा की प्रेरणादायक और पौराणिक कथा, साथ ही जानें संपूर्ण पूजा विधि। वीडियो को अंत तक देखें, लाइक करें और अन्य भक्तों के साथ शेयर अवश्य करें! ​#KushmandaMata_katha ​#KushmandaMata #Navratri2026 #SharadNavratri #MaaKushmanda #NavratriDay4 #DeviKushmanda #HinduMythology #Bhajan #NavratriSpecial #Devotional #HindiKatha #PauranikKatha