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माँ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा में सबसे बड़ा योगदान हर गाँव का रहा हैं!

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माँ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा में सबसे बड़ा योगदान हर गाँव का रहा हैं!

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मां नंदा देवी यात्रा जो कि हिमालय का महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है और यह एशिया की सबसे लंबी पैदल यात्रा है जो की 280 कि है और यह 21 दिनों तक चलने वाली यात्रा है यह उत्तराखंड के कुमाऊ और गढ़वाल से यह यात्रा माँ नंदा देवी की डोली कैलाश की और यानी होम कुंड जाती हैं! #मां #नंदा_देवी_यात्रा_2026 #हिमालय_का_महाकुंभ #uttarakhand माँ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा के मुख्य पड़ाव (Pdav / Route Stages) चमोली के नंदा नगर क्षेत्र और विभिन्न पट्टियों (दशोली, बंड, लाटा) की डोलियों व छंतोलियों का इस यात्रा में पारंपरिक मिलन होता है। यात्रा के मुख्य पड़ाव इस प्रकार रहे: 1. कुरुड़ (सिद्धपीठ - प्रस्थान बिंदु): 5 सितंबर को माँ नंदा की डोली की विदाई के साथ यात्रा का आधिकारिक शुभारंभ हुआ। 2. ग्रामीण क्षेत्र के पड़ाव: यात्रा शुरुआती दिनों 3. रामणी (Nandnagar): यह यात्रा का आठवां और बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहाँ दशोली-बंड की डोली, भगवान बदरी विशाल की छंतोली और लाता की नंदा डोली का आपस में भव्य मिलन हुआ। परंपरा के अनुसार, रामणी के ग्रामीण ही इसके आगे निर्जन क्षेत्रों तक माँ नंदा की डोली ले जाने की मुख्य जिम्मेदारी संभालते हैं। 4. वाण (Wan Village): यह इस पैदल मार्ग का अंतिम सड़क मार्ग (Last Motorable Road) पड़ाव है। यहाँ से आगे की यात्रा पूरी तरह से कठिन पर्वतीय एवं निर्जन रास्तों पर पैदल तय की जाती है। लाटू देवता मंदिर के दर्शन भी यहीं होते हैं।