नैवेद्य अर्पण | स्वाद का मोह घटे, जीवन में संतोष बढ़े | महावीर जिनपूजा
Swami Girish Bharti
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नैवेद्य अर्पण | स्वाद का मोह घटे, जीवन में संतोष बढ़े | महावीर जिनपूजा
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Swami Girish Bharti
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🙏 श्री महावीर जिनपूजा — अष्टद्रव्य पूजा का पाँचवाँ द्रव्य, नैवेद्य अर्पण।
रस रज्जत सज्जत सद्य,
मज्जत थार भरी।
पद जज्जत रज्जत अद्य,
भज्जत भूख अरी।
नैवेद्य अर्पण केवल पकवान चढ़ाने की परंपरा नहीं, बल्कि भूख रूपी रोग पर विजय पाने और जीवन में संयम तथा संतोष अपनाने की पवित्र भावना है।
भगवान महावीर स्वामी का संदेश हमें सिखाता है कि भोजन शरीर की आवश्यकता है, लेकिन स्वाद का मोह मन को अशांत कर सकता है।
इस वीडियो में सुनिए नैवेद्य पूजा का मूल पाठ, सरल भावार्थ और “क्षुधारोगविनाशनाय” मंत्र का अर्थ।
🙏 जय जिनेन्द्र।
प्रस्तुति: स्वामी गिरीश भारती
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