क्रांति में बदल गई जब एक शव यात्रा | हुआ यूं था EPS01 | Baramasa
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5 जनवरी. एक ऐसी तारीख़ जिसके नाम कई ऐतिहासिक घटनाएं दर्ज हैं. 1934 में इसी तारीख को बिहार और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भूकंप आया था जिसमें 11 हजार लोगों की मौत हुई. 1998 में इसी तारीख को देश के पूर्व कार्यकारी प्रधानमंत्री गुलजारीलाल नंदा का निधन हुआ था. 2010 में इस तारीख को शताब्दी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगा. और 1948 में इसी तारीख़ को सदियों से गुलामी झेल रही एक हिमालयी रियासत आजाद हुई. भारत के उत्तरी छोर पर चीन सीमा से लगती एक रियासत ने इस दिन सैकड़ों साल पुराने गुलामी और सामंतवाद के तख्त को उखाड़ फेंका था. एक ऐसी रियासत जिसने भारत की आज़ादी के बाद लगभग दो साल तक स्वतंत्र देश के रूप में सरकार चलाई और फिर एक अगस्त 1949 को भारत में विलय किया. 15 जनवरी टिहरी गढ़वाल रियासत की सामंतवाद से आजादी का भी दिन है. आज baramasa.in की इस सीरीज 'हुआ यूं था' में आपको सुना रहे हैं देश की एक ऐसी रिहासत की कहानी, जहां जनता राजा के खिलाफ उठ खड़ी हुई और रियासत को आजाद करा लिया.
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