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श्रीमद्भागवतगीता। अध्याय ३ कर्म योग का सार। 🌸🙏

Divya dhun

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श्रीमद्भागवतगीता। अध्याय ३ कर्म योग का सार। 🌸🙏

112 просмотров · 12 дн. назад
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🦚 राधे राधे | दिव्य धुन 🦚 🙏 आपका स्वागत है Divya Dhun में। इस वीडियो में हम जानेंगे श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 3 — कर्म योग का सरल और गहरा सार। श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि मनुष्य कर्म किए बिना नहीं रह सकता। इसलिए अपने कर्तव्य से भागने के बजाय, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए। 🌸 इस अध्याय से हमें सीख मिलती है: ✨ कर्म से भागना नहीं चाहिए ✨ अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाना चाहिए ✨ कर्म के फल की अत्यधिक चिंता नहीं करनी चाहिए ✨ इच्छाओं और क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए ✨ अपने कर्मों से दूसरों के लिए अच्छा उदाहरण बनना चाहिए ✨ कर्म को ईश्वर को समर्पित करके मन को शांत रखा जा सकता है “कर्म करते रहिए, नीयत साफ रखिए और श्रीकृष्ण पर विश्वास रखिए।” 🙏 अगर आपको यह गीता सार पसंद आया हो तो वीडियो को Like ❤️ करें, Share करें और Divya Dhun को Subscribe जरूर करें। 🔔 अगले भाग में मिलेंगे श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग के सार के साथ। 🦚 राधे राधे | जय श्री कृष्ण 🦚 #BhagavadGita #GeetaSaar #Adhyay3 #KarmYog #Krishna #ShriKrishna #DivyaDhun #GeetaGyan #SanatanDharma #Bhakti #Spirituality #HinduDharma