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हाँ हम बिहारी हैं जी – थोड़े संस्कारी हैं जी | lyrical completion वाला version, rhyming और fun दोनों

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हाँ हम बिहारी हैं जी – थोड़े संस्कारी हैं जी | lyrical completion वाला version, rhyming और fun दोनों

19 695 просмотров · 11 мес. назад
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“हाँ हम बिहारी हैं जी – The Bihar Anthem (Male–Female Duet)” एक जोशीला, दिल को छू लेने वाला गीत जो बिहार की मिट्टी, मेहनत और संस्कृति की गूंज को आवाज़ देता है। ढोलक, तबला और इलेक्ट्रिक गिटार की ऊर्जा के साथ यह गीत बिहार की गौरवगाथा का जश्न मनाता है। पुरुष स्वर जहाँ जोश और गर्व भरता है, वहीं महिला स्वर उसमें मिठास और भावना जोड़ता है। गीत में बुद्ध की शांति, महावीर की करुणा, आर्यभट्ट का ज्ञान और चाणक्य की नीति की झलक है। यह गाना हर उस बिहारी के दिल से जुड़ता है जो मेहनत से चमकना जानता है। “हाँ, हम बिहारी हैं जी — थोड़े संस्कारी हैं जी!” 🇮🇳🎶 🎤 Vocals: Male & Female Duet 🎧 Genre: Folk Fusion / Patriotic 🎸 Producer: EXPLORE BIHAR EVERY DISTRICT 📍 Location: Bihar, India #BiharAnthem #HaanHumBihariHainJi #BiharPrideSong #BhojpuriFusion #BiharKeLog #IndianAnthem #FolkFusion #BiharCulture #ProudToBeBihari Full Lyrics – “हाँ हम बिहारी हैं जी” (Bihar Anthem) माटी को सोना करने वाली कलाकारी हैं जी, हाँ हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी। बुद्ध का हम ताना-बाना, जैसे प्रिय लागे मखाना, हम हैं महावीर की बानी, आर्यभट्ट जैसे ज्ञानी। ये धरती अशोक वाली, जलती है अबीर बलशाली, उस बंजर को सींचा करते हैं, जिसका न कोई माली। अकेले चाणक्य जैसे सौ-सौ पे भारी हैं जी, हाँ हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी। दिल्ली-बॉम्बे, दुबई, लंडन हमसे गुलजार रहते, सूरीनाम मॉरिशस के खेत भी कहानी कहते। दुनिया में जहाँ भी जाते हैं, हम मेहनत से छा जाते हैं, डूबते सूरज को अरघ चढ़ा, छठ की महिमा बतलाते हैं। कुँवर सिंह, जे.पी. जैसे बागी क्रांतिकारी हैं जी, हाँ हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी। सबसे ज़्यादा IAS-PCS, विद्यापति की रचना हैं हम, रेणु की कहानी दे दी, दिनकर की कविता हैं हम। कभी साँचे में ढल जाते हैं, कभी ख़ुद साँचा बन जाते हैं, कभी चट्टानों से टकरा के, झरना हम नया बहाते हैं। गुरु गोविंद सिंह का साहस, नालंदा की क्यारी हैं जी, हाँ हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी। पटना की गलियों में गूँजती अजानों की पुकार है, सीवान, गया, भागलपुर में सद्भावना अपार है। कब्रों से भी उठती दुआ, मस्जिदों से नूर बरसता, गंगा-जमुनी तहज़ीब यहाँ, हर दिल में बसता। खानकाहों की रूहानी मिट्टी, इबादत में सवारी हैं जी, हाँ हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी। सोन के कछार हैं हम, कोसी गंगाधारी हैं जी, हर दिल में अपनापन, हर बोली में प्यारी हैं जी। सीखा है गिरकर उठना, यही हमारी तयारी है जी, हाँ, हम बिहारी हैं जी — थोड़े संस्कारी हैं जी। 🔥 जय बिहार! 🎶 A Folk–Fusion Anthem Celebrating Bihar’s Pride, Wisdom & Unity 🇮🇳