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Ayi Giri Nandini | Mahishasura Mardini Stotram | Maa Durga Devotional Navratri Song | Ghanikhama

Ghanikhama

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Ayi Giri Nandini | Mahishasura Mardini Stotram | Maa Durga Devotional Navratri Song | Ghanikhama

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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनी नन्दिनुते। गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते॥ भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते। यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते॥ अयि सुदतीजनलालसमानस मोहनमन्मथराजसुते। विरचितमनोहरकान्तिकलाकलितामल कोमलकान्तिकृते॥ अविरलगण्डगलन्मदमेदुर मत्तमतत्तमराजपते। त्रिभुवनभूषणभूतरते नटरतार्धनटेन्द्रसुते॥ कमलदलामलकोमलकान्ति कलाकलितामलभाललते। सकलविलासकलानिलये रतिकलिकेलिषु राजरते॥ करमुरलीरववीजितकूजित लज्जितकोकिलमञ्जुमते। मिलितपुलिन्दमनोहरगुञ्जित रञ्जितशैलनिकुञ्जगते॥ कटितटपीतदुकूलविचित्र मयूखतिरस्कृतचन्द्ररुचे। प्रणतसुरासुरमौलिमणिस्फुरदंशुलसन्नखचन्द्ररुचे॥ कमलां कमलानिलये स कथं न भजते शरणं तव किं न शिवे। तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे॥ जय जय जप्य जये जय शब्दपरस्तुति तत्परविश्वनुते। भण भण भिञ्जिमि भिङ्कृतनूपुर सिञ्जितमोहितभूतपते॥ नटितनटार्धनटी नटराज नटार्धनटी नटनायसुते। नटितनटार्धनटी नटराज नटार्धनटी नटनायसुते॥ सहितमहाहवमल्लमतल्लिक मल्लरते मल्लरते। विरचितवल्लिकमल्लिकमल्लिक मल्लिकमल्लरते॥ सितकृतफुल्लसमुल्लसितारुण तल्लजपल्लवसल्ललिते। तव पदपल्लवमम्बुजमाश्रय येऽनुभजन्ति नरा वरते॥ अयि मयि दीनदयालुतया कृपयैव त्वयि मुनिरमणीयमते। जगतजननि जननिरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि॥ जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि जय जय हे महिषासुरमर्दिनि॥ अयि कमला कमलानिलये कमलानिलये स कथं न भवेत्। तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे॥ जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि जय जय हे महिषासुरमर्दिनि॥ **अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनी नन्दिनुते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥**