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देवी भागवत उप महापुराण का शुभारंभ प्रथम दिवस सिंह अवलोकन भाग-१ by @ Shanta Mittal 7846

Shanta Mittal

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देवी भागवत उप महापुराण का शुभारंभ प्रथम दिवस सिंह अवलोकन भाग-१ by @ Shanta Mittal 7846

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🌺 प्रथम दिवस — देवी भागवत महापुराण का कथासार प्रथम दिवस में महाभागवत अर्थात् देवी भागवत पुराण की रचना और उसके महात्म्य का वर्णन आता है। भगवान वेदव्यास जी द्वारा इसकी रचना तथा इसके श्रवण के महत्व को बताया जाता है। महर्षि जैमिनि द्वारा श्री वेदव्यास जी से शिव-नारद संवाद के रूप में देवी के माहात्म्य का वर्णन सुनाने की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद आदिशक्ति जगदम्बा के स्वरूप और उनकी महिमा का वर्णन होता है। देवी ही समस्त सृष्टि की मूल शक्ति हैं और ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश भी उन्हीं की शक्ति से अपने-अपने कार्यों का सम्पादन करते हैं। देवी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी दिव्य शक्ति का वर्णन किया जाता है। फिर कथा दक्ष प्रजापति की तपस्या की ओर आती है। दक्ष की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवती उनके यहाँ पुत्री रूप में जन्म लेने का वर देती हैं। यही दिव्य कन्या आगे चलकर सती के रूप में प्रकट होती हैं। सती और भगवान शिव के बीच दिव्य प्रेम और विवाह का प्रसंग आता है। दक्ष प्रजापति के मन में भगवान शिव के प्रति द्वेष उत्पन्न हो जाता है। महर्षि दधीचि द्वारा दक्ष को समझाया जाता है कि भगवान शिव परम महेश्वर हैं, परंतु दक्ष अपने अहंकार के कारण शिव-महिमा को स्वीकार नहीं करते। इसके बाद भगवान शिव और माता सती हिमालय पर्वत पर विवाहोत्सव में जाते हैं। वहाँ भगवान शिव की स्तुति और शंकर द्वारा उपस्थित देवताओं को प्रसाद आदि प्रदान करने का प्रसंग आता है। आगे दक्ष द्वारा यज्ञ करने और उसमें भगवान शिव को आमंत्रित न करने का प्रसंग आता है। सती को जब अपने पिता के यज्ञ का समाचार मिलता है तो वे वहाँ जाने की इच्छा प्रकट करती हैं। भगवान शिव उन्हें समझाते हैं कि बिना निमंत्रण जाना उचित नहीं है, फिर भी सती अपने पिता के घर जाती हैं। यज्ञ में पहुँचकर माता सती अपने पति भगवान शिव का अपमान देखकर अत्यंत दुःखी होती हैं। दक्ष द्वारा शिव की निन्दा किए जाने पर माता सती अपने पिता के इस व्यवहार से अत्यंत व्यथित होती हैं और यज्ञ में अपने शरीर का त्याग कर देती हैं। इसके बाद भगवान शिव को जब सती के शरीर-त्याग का समाचार मिलता है, तो वे अत्यंत क्रोधित और दुःखी होते हैं। वे वीरभद्र आदि को आदेश देते हैं और दक्ष के यज्ञ का विध्वंस होने की भूमिका बनती है। विषय-सूची के अनुसार यह प्रसंग प्रथम दिवस के आगे के भाग में विस्तार से आता है। 🌼 प्रथम दिवस की मुख्य शिक्षाएँ 1. अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण है। 2. भगवान शिव जैसे परम तत्व की निन्दा कभी नहीं करनी चाहिए। 3. माता भगवती ही समस्त सृष्टि की मूल शक्ति हैं। 4. पति-पत्नी के बीच श्रद्धा और परस्पर सम्मान का महत्व माता सती के चरित्र से समझ में आता है। 5. यज्ञ, पूजा और धार्मिक कर्मकांड तभी सार्थक हैं जब उनमें भक्ति, विनम्रता और सद्भावना हो। 6. किसी महान संत या देवता का अपमान करने से पहले उसके वास्तविक स्वरूप और महिमा को समझना चाहिए। 7. अहंकार के सामने ज्ञान भी व्यर्थ हो जाता है, इसलिए जीवन में विनम्रता आवश्यक है। #durgasaptashati #chamanlalbhardwaj #जयमातादी #durgachalisa #matarani #दुर्गाआरती