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Budhakedar shiva Temple 🛕 in Uttarakhand tehri Garhwal #subscribe #bholenath #uttrakhnd

Pahadi girl Travel vlog

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64 просмотра · 7 мес. назад
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बूढ़ा केदारनाथ मंदिर - उत्तराखंड ... उत्तराखंड के टिहरी जिले में बाल गंगा और धर्म गंगा के संगम पर स्थित बूढ़ा केदार शिव मंदिर एक प्राचीन तीर्थ स्थल है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को अपने पापों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने इसी स्थान पर वृद्ध (बुजुर्ग) रूप में दर्शन दिए थे, इसीलिए इसे बूढ़ा केदार कहा जाता है. बूढ़ा केदार मंदिर की प्रमुख कहानी और तथ्य: पांडवों को दर्शन: महाभारत काल में पांडव अपने गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव को खोज रहे थे। भगवान शिव उनसे मिलना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक वृद्ध चरवाहे का रूप धारण कर इसी स्थान पर दर्शन दिए। स्थापना: इस मंदिर की स्थापना के बारे में मान्यता है कि यह पांडवों या उनके वंशज जनमेजय द्वारा बनवाया गया था, और बाद में आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका जीर्णोद्धार किया था। पांडवकालीन शिला: मंदिर के भीतर एक विशाल शिला (पत्थर) है, जिस पर पांडवों की आकृतियां और उनके द्वारा की गई पूजा के निशान उभरे हुए हैं। विशेषता: यहाँ स्थित शिवलिंग उत्तर भारत के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक माना जाता है, जिसमें शिव, गणेश, और नंदी के साथ पांडवों की छवि भी दिखाई देती है। नामकरण: शिवजी के वृद्ध स्वरूप में दर्शन देने के कारण ही इस स्थान का नाम 'बूढ़ा केदार' पड़ा। यह स्थान केदारनाथ से भी पहले का माना जाता है। यह मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है और इसे उत्तराखंड के 'पंच केदार' के बाद अगला महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।