❤️ हुज़ूर शहरे मदीना दिखा दिया जाए ❤️
Sameer ahamad Naat khan 786
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❤️ हुज़ूर शहरे मदीना दिखा दिया जाए ❤️
46 просмотров · 11 дн. назад
Sameer ahamad Naat khan 786
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❤️❤️"हे अल्लाह! हमारे आका और मौला हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर अपनी रहमतें और सलामती नाज़िल फरमा।"
• जब हमारे नबी का जन्म हुआ, तो मानो सुबह के वक्त नूर का एक अनोखा सितारा चमक उठा। उनके आने से दोनों जहानों (धरती और आकाश/कौनैन) के चारों ओर उजाला फैल गया। इस खूबसूरत और दिलकश ❤️❤️❤️❤️नजारे का इस्तकबाल करते हुए कवि "मरहबा" (इस्तकबाल है) कह रहा है।
• तैबा (मदीना/मक्का की पाक जमीन) की सुबह में नूर का खजाना या हिस्सा बंट रहा है। पूरी कायनात उस परम प्रकाश (पैगंबर) से बरकत और खैरात (सदका) लेने के लिए लालायित है।
• उस समय के बड़े-बड़े रईस और उलमा लोग भी इस नूर की गवाही और हवाला दे रहे हैं। कायनात में ऐसा कोई भी नहीं है, जिसे हमारे नबी के आने से रहमत और दया का हिस्सा न मिला हो।
• कवि स्वयं को एक याचक (मंगता/भिखारी) और पैगंबर साहब को दो जहानों का बादशाह मानते हुए प्रार्थना कर रहा है कि "मैं तो एक भिखारी हूँ और आप शहंशाह हैं, मेरे खाली प्याले को अपने नूर और रहमत से भर दीजिए।" वह दुआ करता है कि आपका यह नूर दिन-दूना बढ़ता रहे।
• अल्लाह की कैसी असीम कृपा है कि चारों तरफ नूर की बारिश हो रही है। पैगंबर साहब का पूरा वंश (नस्ले पाक) और घराना (अहले बैत) ही पवित्रता और ईश्वरीय प्रकाश से भरा हुआ है, जिसका बच्चा-बच्चा नूरानी है।
• ईश्वर (रब) की कृपा और कृपा-दृष्टि से वे (पैगंबर साहब) अपने बचपन में पालने (महेद) में रहते हुए भी❤️❤️❤️❤️ जैसे पूरी कायनात पर अपनी हुकूमत का अहसास कराते हैं।
• देखना कितना अद्भुत और हैरान करने वाला है कि वे पालने में लेटे हुए चंद्रमा (कमर) को अपनी मर्जी से घुमा रहे हैं।
• उम्मत के सुल्तान (पैगंबर साहब) पालने में ही ऐसे-ऐसे मोजिज़े (चमत्कार) दिखा रहे हैं।
वे पालने में लेटे हुए अपनी उंगली से जिस तरफ भी इशारा करते हैं, आसमान का चाँद भी उसी दिशा में झुक जाता है।
• नूर (दिव्य प्रकाश) का❤️❤️❤️❤️ वह खिलौना यानी चाँद, उनके उंगलियों के इशारों पर कितनी खूबसूरती से घूमता और चलता था। यह आला हज़रत का बहुत प्रसिद्ध मिसरा है।
• आला हज़रत (इमाम अहमद रज़ा) का लिखा हुआ यह 'कसीदा-ए-नूर' पूरी दुनिया में बहुत ज्यादा मशहूर और मकबूल है।
: इस प्रसिद्ध कसीदे पर जो यह तज़मीन (काव्य रचना) जोड़ी गई है, वह भी इसके मूल कसीदे की बरकत के कारण बेहद खूबसूरत और मशहूर हो गई है।
• इस पाक कलाम को पढ़ने और सुनने से हर तरफ रूहानी रोशनी (नूर) फैल गई है और अंधेरा (जुल्मत/बुराइयाँ) दूर हो गया है।
• शायर खुद से या आला हज़रत (रज़ा) से मुखातिब होकर कहता है कि यह जो नूर की बरसात हो रही है, यह दरअसल हज़रत अहमद (पैगंबर साहब) के दिव्य प्रकाश का ही आशीर्वाद (फैज़) है।
• कसीदा-ए-नूर के इन पाक शब्दों को अपनी ग़ज़ल या शायरी में शामिल करने से शायर की खुद की रचना भी नूरानी और बेहद कीमती हो गई है।❤️❤️❤️❤️