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हरिद्वार के जंगल में पंचमुखी सिद्ध हनुमान मंदिर | Panchmukhi Hanuman Mandir Haridwar Uttrakhand

Dharmik Dharti

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हरिद्वार के जंगल में पंचमुखी सिद्ध हनुमान मंदिर | Panchmukhi Hanuman Mandir Haridwar Uttrakhand

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Dharmik Dharti
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हरिद्वार: देवभूमि के कण-कण में देवताओं का वास और पग-पग पर देवालयों की भरमार है. इसलिए इसे देवताओं की जगह भी कहा जाता है. धर्मनगरी हरिद्वार में प्राचीन मंदिरों का खजाना भरा हुआ है, जहां देशी ही नहीं विदेशी भी शीश नवाने आते हैं. साथ ही श्रद्धालुओं को देवभूमि के आध्यात्म और प्रकृति से रूबरू होने का मौका मिलता है. ऐसा ही एक हनुमान मंदिर राजाजी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीचों-बीच स्थित है. यहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. मान्यता है कि इनका नाम लेने से ही समस्याएं दूर होकर जीवन में खुशहाली का वास होता है. आइए जानते हैं मंदिर की महिमा... मंदिर की धार्मिक मान्यता:मनोकामना सिद्ध श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के बारे में मान्यता है कि जिस समय हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था तो पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया था. उस समय भगवान इंद्र ने बाल हनुमान पर वज्र से आघात किया था, जिससे उनके मुंह से सूर्य देव निकल गए थे और वे मूर्छा खाकर हरिद्वार के जंगल में आकर गिर गए थे. इसी स्थान पर श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर है, जहां हनुमान जी की पिंडी रूप में पूजा होती है. हरिद्वार के पाँच प्रमुख मंदिर इस प्रकार हैं: 1.मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple): यह मंदिर शिवालिक पहाड़ियों (बिल्व पर्वत) की चोटी पर स्थित है और माँ मनसा देवी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, इसीलिए इन्हें 'मनसा' (मन की इच्छा पूरी करने वाली) कहा जाता है। यह एक सिद्धपीठ है और यहाँ से हरिद्वार शहर का बहुत सुंदर नजारा दिखता है। 2.चंडी देवी मंदिर (Chandi Devi Temple): नील पर्वत के शिखर पर स्थित यह मंदिर देवी चंडी को समर्पित है और यह भी एक अत्यंत पवित्र सिद्धपीठ है। यह मंदिर 1929 में कश्मीर के राजा सुचत सिंह द्वारा बनवाया गया था। यहाँ भक्त केबल कार (रोपवे) या पैदल मार्ग से जा सकते हैं। 3.दक्ष महादेव मंदिर (Daksha Mahadev Temple): कंखल में स्थित यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष ने यहाँ यज्ञ किया था और सती ने यही अग्नि कुंड में अपने प्राण त्यागे थे। यह स्थान हिंदू पौराणिक कथाओं में गहरा महत्व रखता है। 4.माया देवी मंदिर (Maya Devi Temple): माया देवी मंदिर को हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। यह उन 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माता सती की नाभि गिरी थी। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और हर की पौड़ी के पास स्थित है। 5. भारत माता मंदिर (Bharat Mata Mandir): यह मंदिर अन्य मंदिरों से भिन्न है क्योंकि यह किसी देवी-देवता को नहीं, बल्कि भारत माता को समर्पित है। इसका उद्घाटन 1983 में इंदिरा गांधी द्वारा किया गया था। इस आठ मंजिला मंदिर में भारत के स्वतंत्रता सेनानियों, संतों और देवी-देवताओं के विभिन्न रूप दर्शाए गए हैं