Gagron Fort,गागरोन के किले का इतिहास | History of Gagron Fort of jhalawad Rajasthan jal durg
safal journey
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Gagron Fort,गागरोन के किले का इतिहास | History of Gagron Fort of jhalawad Rajasthan jal durg
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#कौन सा दुर्ग जल दुर्ग की श्रेणी में आता है#gagronfort #rajasthan#jhalawad #गागरोन किला कब बना#गागरोन का राजा कौन था$झालावाड़ के राजा कौन थे?#Gagron Ka Kila - #Rajasthan के Jhalawar जिले में स्थित गागरोन के किले के बारे में इस पोस्ट में हम पूरी और विस्तृत जानकारी देने वाले है। यदि आपको राजस्थान के जनरल नॉलेज में रूचि है तो आपको इस Gagron Fort के बारे में लिखी गयी यह पोस्ट पसंद आएगी। जैसा की आपको पता है की राजस्थान का इतिहास बहुत ही गहरा और पुराना है। इसी के साथ ही यहाँ की कला भी बहुत ही शानदार और पुरानी है। Rajasthan History में Gagron Ka Kila के बारे में बहुत ही अच्छी जानकारी मिल जाती है। तो आईये अब जानते है इस गागरोन के किले के बारे में पूरी विस्तृत और सटीक जानकारी Hindi में।
#Gagron Ka Kila
#Gagron Ka Kila/ Gagron Fort
गागरोन का किला (झालावाड़) इसे डोडगढ़/ धूलरगढ़/ जलदुर्ग / औदकदुर्ग/मुस्तफाबाद के नाम से जाना जाता है। Gagron Ka Kila राजस्थान का एकमात्र ऐसा किला है जो बिना किसी नींव के एक चट्टान पर सीधा खड़ा है।
गागरोन दुर्ग का निर्माण 7-8वीं शताब्दी में मुकन्दरा की पहाड़ी पर कालीसिंधव आह नदी के संगम पर डोडा राजपत (परमार) ने करवाया जो जलदुर्ग या औदक दुर्ग का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
कालीसिन्ध व आहू नदी के संगमस्थल को स्थानीय भाषा में 'सामेलजी' के नाम से जाना जाता है। खींची राजवंश के संस्थापक 'देवनसिंह अर्क' (धारू) ने इस दुर्ग का नाम 'गागरोन' / 'Gagron '(1195 में) रखा, तो Gagron Ka Kila पर मालवा सल्तनत कायम होने के बाद महमूद खिलजी प्रथम ने गागरोन के किले में एक कोट का निर्माण करवाकर इसका नाम 'मुस्तफाबाद' रख दिया था।
#History Of Gagron Fort
पौराणिक कथाओं के अनुसार, "भगवान कृष्ण के पुरोहित गर्गाचार्य ने इसका निर्माण करवाया, अतः प्राचीन ग्रन्थों में इसे 'गर्गापुर' नाम दिया गया।"
मीठेशाह की दरगाह खुरासन से आये सूफी सन्त हमीमुद्दीन चिश्ती की समाधि को मीठेशाह की दरगाह के नाम से जाना जाता है। जिसका निर्माण औरंगजेब ने गागरोन दुर्ग में करवाया।
गागरोन में खींची राजवंश में 'सन्त पीपा' (पीपाराव) हुए।
इनका मूल नाम 'प्रताप सिंह' था। ये रामानन्द के शिष्य बने, जो दिल्ली के 'सुल्तान फिरोजशाह तुगलक' के समकालीन थे। संत पीपा को दर्जी समुदाय के देवता कहते हैं। इनके अनुसार मोक्ष का प्रमुख साधन 'भक्ति' था। संत पीपा की छतरी-गागरोन दुर्ग में, मंदिर-समदड़ी गाँव (बाड़मेर) में है, तो इनकी गुफा टोडारायसिंह (टोंक) में है।
गागरोन के किले में छोटे-बड़े कुल 92 मन्दिर हैं। इस दुर्ग में सौ वर्षीय पंचाग रखा है, जो विश्व प्रसिद्ध है। गागरोन में कोटा रियासत के सिक्के ढ़ालने की टकसाल दर्शनीय है।
इस दुर्ग में बने 'जालिम कोट' का निर्माण तत्कालीन कोटा रियासत के शासक 'जालिम सिंह झाला' ने करवाया। गागरोन Durg को 2013 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया तथा दिसम्बर 2018 में इस दुर्ग पर 5 रु. का डाक टिकट जारी किया।
Gagron Durg Ke Sake / गागरोन दुर्ग के साके
गागरोन दुर्ग में Rajasthan के इतिहास के दो प्रमुख साके हुए।
1423 का प्रथम साका-इस समय अचलदास खींची व हुशंगशाह के मध्य युद्ध हुआ।
1444 का द्वितीय साका-इस समय अचलदास खींची के पुत्र पाल्हणसी व महमूद खिलजी के मध्य युद्ध हुआ एवं इसमें महमुद खिलजी विजयी हुआ।
Gagron Ka Kila (गागरोन का किला) Jhalawar, Rajasthan