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चदरिया झीनी रे झीनी | Kabir | Kavyaraag

Kavyaraag

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चदरिया झीनी रे झीनी | Kabir | Kavyaraag

140 697 просмотров · 1 месяц назад
Kavyaraag
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यह शरीर एक बेहद महीन चादर है, जिसे बनने में नौ-दस महीने ही नहीं, शायद अनगिनत जन्मों का संचित सौभाग्य लगा है। लेकिन झूठे अहंकार, लोभ, लालच और राग-द्वेष से हम उसे जीवन भर मैला करते रहते हैं। संत कबीर इस अमूल्य जीवन को निर्मल रखने का मार्ग दिखाते हैं— चदरिया झीनी रे झीनी, राम नाम रस भीनी। कवि – संत कबीर Composed by Chinmayi Tripathi & Joell यदि यह प्रस्तुति आपको पसंद आए, तो वीडियो को Like करें, Share करें और Kavyaraag को Subscribe करना न भूलें। #Kavyaraag #Kabir #ChadariyaJheeniReJheeni #SantKabir #HindiPoetry #Bhakti #IndianMusic #PoetryToMusic #SpiritualMusic #SoulfulMusic #ClassicalFusion #FolkMusic #ChinmayiTripathi #Joell #PoetryLovers