सही फैसला लेने के बाद भी मन भारी क्यों होता है? | Jeevan Ki Ankahi Baatein
अनकही बातें
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सही फैसला लेने के बाद भी मन भारी क्यों होता है? | Jeevan Ki Ankahi Baatein
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कभी-कभी हम बहुत सोच-समझकर कोई फैसला लेते हैं।
हमें पता होता है कि उस समय वही करना ठीक था…
फिर भी मन हल्का नहीं होता।
कभी किसी अपने को “नहीं” कहना पड़ता है।
कभी एक अच्छा अवसर छोड़ना पड़ता है।
कभी आसान रास्ते की जगह मुश्किल रास्ता चुनना पड़ता है।
और उसके बाद मन पूछता है—
अगर फैसला सही था, तो इतना बुरा क्यों लग रहा है?
शायद इसलिए क्योंकि सही फैसला लेने का मतलब यह नहीं कि उसमें कुछ छूटेगा नहीं।
कभी-कभी दुख फैसले के गलत होने का नहीं होता…
उस चीज़ का होता है जिसे सही फैसला लेते समय हमें छोड़ना पड़ा।
इसी फर्क पर आज की बात।
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