#136 दरसन दो धनश्याम नाथ (1)-भजन (2008)। Swami Prem Vivekanand-Darshan Do Ghanshyam Naath (1)-Bhajan
Bhajan Swami Prem Sadhana Kendra भजन स्वामी प्रेम
0:00 / 0:00
#136 दरसन दो धनश्याम नाथ (1)-भजन (2008)। Swami Prem Vivekanand-Darshan Do Ghanshyam Naath (1)-Bhajan
6 371 просмотр · 2 г. назад
Bhajan Swami Prem Sadhana Kendra भजन स्वामी प्रेम
2,98 тыс. подписчиков
6 371 просмотр · 2 г. назад
दरसन दो धनश्याम नाथ मोरी अखियाँ प्यासी रे।
मन मंदिर की ज्योति जला दो, घट-घट वासी रे।
1. मंदिर-2 मूरत तेरी, फिर भी न दीखे सूरत तेरी।
आँख मिचोली छोड़ो अब तो, घट-घट वासी रे।
2. द्वार दया का जब तू खोले, पंचम सुर में गूंगा बोले।
बहिरा सुनले, लंगडा चल कर, पहुँचे काशी रे।
3. पानी पी-पी प्यास बुझाऊँ, नैनन को कैसे समझााऊँ।
युग बीते ना आई मिलन की, पूरणमासी रे।