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Woh Khamosh Mulakat ‪@MusicofAthor‬

Music of Athor

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Woh Khamosh Mulakat ‪@MusicofAthor‬

8 просмотров · 1 дн. назад
Music of Athor
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🎵 वो ख़ामोश मुलाक़ात [मुखड़ा] वो रात कुछ कहती थी, ये रात भी चुप है क्यों, वो पास आके ठहरी थी, अब दूर लगती है क्यों। वो आँखों में इक राज़ था, ये आँखें भी उदास हैं, वो कल भी मेरे ख़्वाब में, आज भी मेरे पास है। वो रात कुछ कहती थी, ये रात भी चुप है क्यों, वो पास आके ठहरी थी, अब दूर लगती है क्यों। [अंतरा 1] हवा के साथ उड़ती हुई, ज़ुल्फ़ों की वो कहानी, लबों पे रुक गई थी जो, वो बात थी सुहानी। मैं उसके दिल की धड़कनों में अपना नाम ढूँढ़ता, वो मेरी हर निगाह में कोई सवाल ढूँढ़ती। न जाने क्या था दरमियाँ, न शिकवा था, न गिला, वो सामने जो आ गई, तो वक़्त ही रुक चला। [मुखड़ा] वो रात कुछ कहती थी, ये रात भी चुप है क्यों, वो पास आके ठहरी थी, अब दूर लगती है क्यों। [अंतरा 2] वो चाँदनी में भीगकर जब सामने थी आई, मेरी ख़ामोशियों ने भी इक दास्ताँ सुनाई। उसकी हँसी के रंग में कुछ ख़्वाब घुल गए, जो लफ़्ज़ कह न पाए हम, वो आँखों से कह गए। मैं आज भी उसी जगह कुछ देर रुकता हूँ, जहाँ वो मुस्कुराई थी, वहीं ख़ुद को पाता हूँ। [अंतरा 3 — गहरा एहसास] शायद उसे भी इश्क़ था, शायद मुझे गुमाँ, दोनों के बीच रह गया बस इतना फ़ासला। वो लौटकर न आ सकी, मैं भूल न सका उसे, इक पल की उस मुलाक़ात में उम्र भर पा लिया उसे। कुछ रिश्ते नाम के बिना भी मुकम्मल हो जाते हैं, कुछ चेहरे दूर रहकर भी दिल में घर बनाते हैं। [अंतिम मुखड़ा] वो रात कुछ कहती थी, ये रात भी चुप है क्यों, वो पास आके ठहरी थी, अब दूर लगती है क्यों। वो कल भी मेरे ख़्वाब में, आज भी मेरे पास है, वो एक छोटी-सी मुलाक़ात, मेरी पूरी ज़िंदगी के साथ है। वो रात कुछ कहती थी… ये रात भी चुप है क्यों… वो दूर होकर भी आख़िर, मेरे इतने पास है…