🙏प्रेम रावत जी नए BHAKTI RAS SE BHARPUR भजनों का संगम 019🙏|| Prem marg bhajan || Prem rawat bhajan🙏
Prem Marg
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🙏प्रेम रावत जी नए BHAKTI RAS SE BHARPUR भजनों का संगम 019🙏|| Prem marg bhajan || Prem rawat bhajan🙏
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🙏प्रेम रावत जी नए BHAKTI RAS SE BHARPUR भजनों का संगम 019🙏|| Prem marg bhajan || Prem rawat bhajan🙏
BHAJAN NAMES:-
01. तीन बार भोजन- New bhajan-
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
ओ मनवा क्यों सोया है तू,
जाग ले अब इस संसार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
सुबह हुई तो भागे-भागे,
दुनिया के कामों में,
नाम तेरा भूल गया तू,
माया के इन जालों में,
साँझ ढले फिर थककर बोले,
कल से करूँगा विचार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
पेट की खातिर दौड़ लगाई,
मन को भूखा छोड़ा,
धन-दौलत के पीछे भागा,
सतगुरु से नाता तोड़ा,
कैसा ये जीवन जीता है,
भूल गया सच्चा प्यार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
सतगुरु दर पे ज्योत जली है,
प्रेम का सागर बहता,
जो भी आता शरण में उनकी,
दुख से पार वो रहता,
बस एक बार तू नाम जप ले,
खुल जाए तेरा द्वार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
क्षण-क्षण जीवन बीत रहा है,
साँसों का क्या ठिकाना,
आज नहीं तो कल जाना है,
सबको यही फसाना,
समय रहते संभल जा प्यारे,
मत कर यूँ इंकार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
राम नाम की माला जप ले,
मन को शांति मिलेगी,
अंदर बैठा जो परमात्मा,
उसकी झलक दिखेगी,
एक-एक दाना जैसे जरूरी,
नाम भी उतना सार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
माया के रंग फीके पड़ते,
नाम का रंग निराला,
जो भी रंगा इस रंग में,
उसने पाया उजियाला,
सतगुरु का हाथ थाम ले तू,
हो जाएगा बेड़ा पार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
तेरे अंदर जो दीप जलेगा,
अज्ञान अंधेरा भागे,
मन मंदिर में शांति उतरे,
प्रेम के सागर लागे,
बस एक बार तू सच्चे मन से,
कर ले प्रभु से प्यार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
ओ मनवा अब जाग भी जा,
छूट न जाए ये अवसर बार-बार,
तीन बार भोजन, भजन एक बार,
राम तेरी माला भजूँ ना एक बार,
02. बूटी घुटी- New bhajan-
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सतगुरु नाम की अमृत धारा, मन में बरसे झरझर झुटी,
सतगुरु नाम की अमृत धारा, मन में बरसे झरझर झुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सतगुरु का दरबार निराला, प्रेम का दीप जलाए,
जिसने सच्चे मन से पुकारा, वह खाली हाथ न जाए,
अंतर की नींद जगा दे, ऐसी मीठी यह लुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
माया के इस झूठे जग में, सब कुछ है दो दिन का,
सतगुरु नाम का सहारा, सच्चा साथी जीवन का,
भटके मन को राह दिखाए, गुरु की वाणी सुठी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सतगुरु प्रेम का सागर गहरा, डूबे जो सुख पाए,
अंतर में जो ज्योति जले तो, अज्ञान दूर हो जाए,
मन मंदिर में गूँज रही है, नाम की मधुर बंसी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
संसार के सब बंधन टूटें, जब गुरु हाथ पकड़ लें,
जीवन की नैया भवसागर से, पार वही कर दें,
जो गुरु की शरण में आया, उसकी किस्मत छूटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
नाम का अमृत पीते जाओ, मन को शांति मिलेगी,
सतगुरु की कृपा से ही तो, जीवन ज्योति जलेगी,
प्रेम भक्ति में डूबे रहना, यही सच्ची है पूंजी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
सदा रहो अलमस्त भजन में, पी ले ना बूटी घुटी,
03. भरी जवानी सेवा- New bhajan-
सेवा करो भरी जवानी में,
बुढ़ापा किसने देखा है,
सतगुरु का नाम जप लो,
कल का किसने लेखा है,
सेवा करो भरी जवानी में,
बुढ़ापा किसने देखा है,
आज है ताकत, आज है समय,
कल ये साथ न देगा,
धीरे-धीरे ढलती उम्र में,
तन भी साथ न देगा,
जो करना है कर ले अब ही,
वक़्त नहीं ठहरा है,
सेवा करो भरी जवानी में,
बुढ़ापा किसने देखा है,
माया के रंग में रंगा है मन,
सच को भूल गया है,
झूठे सुख के पीछे भागे,
अपना मूल खो गया है,
सतगुरु की राह पकड़ ले,
यही सच्चा रस्ता है,
सेवा करो भरी जवानी में,
बुढ़ापा किसने देखा है,
सतगुरु द्वार खुला है तेरे,
प्रेम का सागर बहता,
जो भी आता शरण में उनकी,
सुख-शांति वही पाता,
सेवा का अवसर मिलना,
भाग्य से ही मिलता है,
सेवा करो भरी जवानी में,
बुढ़ापा किसने देखा है...
04. भाई रे ऐसा सतगुरु कहिय- New bhajan...
05. ---
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