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आईना - अब कौन सुधरेगा? | Official Rap Song | Neeraj Sharma [AI Vocals]

Neeraj Sharma

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आईना - अब कौन सुधरेगा? | Official Rap Song | Neeraj Sharma [AI Vocals]

33 просмотра · 2 недели назад
Neeraj Sharma
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बदली है दुनिया, बदले हैं इंसान, दिखावे की दौड़ में खोई है पहचान... आईना है सामने, अब कौन सुधरेगा? प्रस्तुत है आज के दौर का सबसे कड़वा और सच्चा गाना 'आईना' (अब कौन सुधरेगा?). इस रैप के जरिए समाज की कड़वी सच्चाई, सोशल मीडिया का डिप्रेशन, राजनीति का गंदा खेल, धर्म के नाम पर नफरत और शिक्षा के बढ़ते व्यापार को बेबाक तरीके से दर्शाया गया है। अगर आपको भी लगता है कि बदलाव की शुरुआत खुद से होनी चाहिए, तो इस वीडियो को शेयर जरूर करें! 🎵 Song Credits: • Created & Written by: Neeraj Sharma • Music Production & Composition: Neeraj Sharma • Vocals: AI Generated • Language: Hindi / Hinglish Copyright Disclaimer: © YouTube Copyright Protected 2026 by Neeraj Sharma. All rights reserved. Unauthorized re-uploading or modification of this audio/video is strictly prohibited. #Aina #AbKaunSudhrega #NeerajSharma #HindiRap2026 #SocialRap #NewHindiSong #ViralRap #TrendingMusic #Aina #AbKaunSudhrega #NeerajSharma #HindiRap2026 #SocialRap #NewHindiSong #ViralRap #TrendingMusic #IndianHipHop #SocialAwarenessSong #AIVocals ***************************************** *******-------- Song Lyrics -----------****** बदली है दुनिया, बदले हैं इंसान, (हाँ... बदले हैं इंसान!) दिखावे की दौड़ में खोई है पहचान। (खोई है पहचान!) सच्चाई है कड़वी, पर सुनना तो पड़ेगा, आईना है सामने, अब कौन सुधरेगा? (बोलो... कौन सुधरेगा?) (बोलो... बोलो... कौन सुधरेगा?) सुनो कान खोल के, ये आज की जनरेशन है, हाथ में है स्क्रीन, पर दिमाग में डिप्रेशन है। (बहुत डिप्रेशन है!) (बहुत डिप्रेशन है नीरज भाई ) रील्स की है दुनिया, यहाँ लाइक्स ही ईमान है, फॉलोअर्स तो लाखों हैं, पर इंसान अनजान है। (बिल्कुल अनजान!)(बिल्कुल अंजान है नीरज भाई) दुनिया की सोच आज संकीर्ण हो चुकी, कपड़ों से औकात यहाँ मापी जाने लगी। (देख के औकात!) जजमेंटल हैं सब, बस उंगली उठाना काम है, बाहर से हैं सभ्य, अंदर नफरत सरेआम है। सच्चाई का मोल नहीं, यहाँ झूठ का व्यापार है, जो जितना बड़ा धोखेबाज़, वो उतना समझदार है! (कड़वा सच नीरज भाई!) बदली है दुनिया, बदले हैं इंसान, (हाँ... बदले हैं इंसान!) दिखावे की दौड़ में खोई है पहचान। (खोई है पहचान!) सच्चाई है कड़वी, पर सुनना तो पड़ेगा, आईना है सामने, अब कौन सुधरेगा? अब सुनो राजनीति, जो खेल रही चाल है, (गंदी चाल है!) जनता की जेब खाली, नेता मालामाल है। (सब मालामाल है!) कुर्सी के भूखे यहाँ, वादे सब बेकार हैं, वोट बैंक के लिए ये करते अत्याचार हैं। और धर्म का क्या कहें? वो तो धंधा बन गया, (हाँ... भाई धंधा ही बन गया!) इंसानियत को भूल, इंसान अंधा बन गया। ग्रंथों की बातें बस भाषणों में रह गईं, नफरत की दीवारें दिलों के बीच ढह गईं। (दिलों के बीच ढह गईं!) भगवान और अल्लाह को आपस में लड़ाते हैं, ये धर्म के ठेकेदार खुद को मसीहा बताते हैं। सच्चा धर्म तो वो था, जो भूखे को रोटी दे, पर यहाँ तो मज़हब के नाम पर बस लाशें ही बिछीं! (लाशें ही बिछीं!) पढ़ाई की बात करूँ? ये शिक्षा नहीं, व्यापार है, (खुला व्यापार है!) डिग्रियों की सेल है, पर युवा बेरोजगार है। रट्टा मारो, पास हो, बस यही सिखाया जाता है, ज्ञान से ज्यादा यहाँ पैकेज को गिना जाता है। (बस पैसा गिना जाता है!) क्लासरूम अब बन चुके हैं बस एक फैक्ट्री, जहाँ हुनर को दबा के, बस नंबरों की है एंट्री। (सिर्फ नंबरों की एंट्री!) और दोस्ती? वो तो बस मतलब का एक नाम है, काम निकल जाए तो फिर 'कौन हो तुम?' राम-राम है। (भाई... राम-राम है!)(बिल्कुल ऐसा ही हो गया नीरज भाई) फेसबुक पे फ्रेंड्स हैं, पर संकट में कोई पास नहीं, आज के इस दौर में किसी पे विश्वास नहीं। पीठ पीछे छुरा भोंकना, अब आम बात है, सच्चा दोस्त मिलना, जैसे कोई करामात है! (एक करामात है!) बदली है दुनिया, बदले हैं इंसान, (हाँ... बदले हैं इंसान!) दिखावे की दौड़ में खोई है पहचान। (खोई है पहचान!) सच्चाई है कड़वी, पर सुनना तो पड़ेगा, आईना है सामने, अब कौन सुधरेगा? (बोलो... कौन सुधरेगा?) (बोलो... बोलो... कौन सुधरेगा?) ये कड़वा सच है भाई... इसे मानो या ना मानो। (मानो या ना मानो...) बदलना है तो पहले खुद के अंदर की बुराई को पहचानो। नीरज भाई ने ये बात इस गाने में बताई पॉलिटिक्स, धर्म, दोस्त या पढ़ाई... पहले खुद को सुधारो, ये बात सीधे समझ आई? (बात सीधे समझ आई!) (सही बोले नीरज भाई) *****************************************