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मेरे जीव सुहागी रे... | जीव-आत्मा का रहस्य और चितवनी का महत्व | ‪@shrirajanswami‬ ‪@SPJIN‬

SPJIN

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मेरे जीव सुहागी रे... | जीव-आत्मा का रहस्य और चितवनी का महत्व | ‪@shrirajanswami‬ ‪@SPJIN‬

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इस वीडियो में तारतम वाणी के प्रकाश द्वारा जीव और आत्मा के सूक्ष्म अंतर को समझाया गया है। मुख्य विषय (Key Highlights): जीव और आत्मा का अंतर: जीव 17/19 तत्वों और उपाधियों से जुड़ा चैतन्य है, जबकि आत्मा सर्वत्र व्यापक विशुद्ध चैतन्य स्वरूप है। मेराज जी का जीव और इंद्रावती जी की आत्मा: जागनी लीला में अक्षरातीत के आवेश स्वरूप का कार्य। अंगना भाव और चितवनी: अध्यात्म में स्त्री-पुरुष भाव का वास्तविक अर्थ और माधुर्य भावना का महत्व। 'मेरे जीव सुहागी रे' प्रकरण: तारतम ज्ञान के प्रकाश से जीव को सुहागन कहलाने का अधिकार और अक्षरातीत के चरणों का आश्रय। #TartamVani #SunderSathJi #pravachan #spiritualknowledge #sanatandharma #JeevAurAtma #paramdham_darshan #chitwani #NijanandSampraday #PrannathJi