Gorakhnath Mandir Gorakhpur | गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर | V033
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गोरखनाथ मंदिर में भारतीय संत सभा की चिंतन बैठक हो रही है। गुरु गोरक्षनाथ की तपोस्थली को गोरखनाथ मंदिर कहते हैं। महंत आदित्यनाथ के मुताबिक, मंदिर में त्रेतायुग के समय से जल रही अखंड धूना और ज्योति आज तक नहीं बुझी। वहां मौजूद भीम सरोवर का जल भी कभी नहीं सूखता। मान्यता है कि इस सरोवर में सभी प्रमुख नदियों का पानी है। जानिए कैसे गोरखनाथ पड़ा नाम और कैसे बना सरोवर...
बाबा गोरक्षनाथ ने त्रेता युग में तपस्या की थी। ज्वाला देवी के स्थान से खिचड़ी की भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर के अचिरावती नदी (राप्ती) पहुंचे थे। यहां वह साधना में लीन हो गए। उनके नाम पर ही इस शहर का नाम गोरखनाथ पड़ा। कहा जाता है कि पांडवों द्वारा किए जा रहे राजसूय यज्ञ का निमंत्रण लेकर महाबली भीमसेन यहां आए। बाबा को तपस्या में लीन देख वे यहां कुछ देर आराम करने लगे। वे जब जगे तो वहां एक सरोवर बन गया था।
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