गुरु वाक्यम् एपिसोड 743 : शिव के अनाहत से ऐसे जुड़िए
Shiv Yog
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गुरु वाक्यम् एपिसोड 743 : शिव के अनाहत से ऐसे जुड़िए
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हर मनुष्य उस शिव का ही अंश हैं, उसी का प्रतिरूप हैं। हमारा सहस्त्रार्ध शिव का अनाहत चक्र है। उनका निस्वार्थ प्रेम शाम्भवी शक्ति के रूप में सहस्त्रार्ध और नेत्रों से प्रवाहित होने लगता है। इसके अतिरिक्त, आपका तीसरा नेत्र आपकी सोच के साथ चलता है। तीसरे नेत्र से शाम्भवी शक्ति आप अनंत तक भेज सकते हैं। इसमें इतनी शक्ति है कि वह आपके कर्मो को भेद कर उसकी नकारात्मकता को भी धो डाले। इसलिए शिवयोग शक्ति से जुड़ने के बाद आपको अपनी सोच के प्रति अधिक सजग होना होगा, क्योंकि जहाँ आपकी सोच जायेगी वहीँ शक्ति प्रवाहित होने लगेगी।
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