राजा भरतरी की कथा!! सिंगर: जयराम जाखड़/M.9413202188
SINGER JAYRAM JAKHAR
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राजा भरतरी की कथा!! सिंगर: जयराम जाखड़/M.9413202188
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राजा भरतरी की कथा!!
राजा भर्तृहरि (भरथरी) की कथा भारत की सबसे प्रसिद्ध लोक कथाओं में से एक है, जो वैराग्य, त्याग और मोह-माया की नश्वरता को दर्शाती है। राजा भर्तृहरि उज्जैन के प्रतापी शासक और महान विद्वान थे, जिन्होंने बाद में अपना राज-पाट छोड़कर गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली और जोगी बन गए।
इनके वैराग्य धारण करने के संबंध में लोक कथाओं में दो मुख्य कहानियां बहुत प्रचलित हैं:
1. चमत्कारी अमर फल और धोखे की कथा (सबसे प्रचलित कथा)
• अमर फल की प्राप्ति: राजा भर्तृहरि अपनी तीसरी पत्नी रानी पिंगला से अत्यंत प्रेम करते थे और उनके मोह में डूबे हुए थे. एक दिन उज्जैन के दरबार में परम तपस्वी गुरु गोरखनाथ का आगमन हुआ. राजा के आदर-सत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने राजा को एक चमत्कारी अमर फल दिया, जिसे खाने से व्यक्ति हमेशा जवान और सुंदर बना रहता.
• मोह का जाल: राजा ने सोचा कि वह खुद अमर होकर क्या करेंगे, उनकी प्रिय रानी पिंगला हमेशा सुंदर बनी रहनी चाहिए. उन्होंने वह फल रानी पिंगला को दे दिया.
• प्रेम का त्रिकोण और सत्य: रानी पिंगला राजा से नहीं, बल्कि राज्य के घुड़साल के रखवाले (अश्वपाल) से प्रेम करती थी. उसने वह फल उस रखवाले को दे दिया. वह रखवाला एक नगर वधू (वेश्या) से प्रेम करता था, इसलिए उसने वह अमर फल उस वेश्या को भेंट कर दिया.
• राजा को सत्य का ज्ञान: वेश्या ने सोचा कि उसका जीवन तो पापमय है, यदि यह फल राजा खाएंगे तो वे लंबे समय तक प्रजा की भलाई कर सकेंगे. वह फल लेकर राजा भर्तृहरि के पास पहुंच गई. राजा अपने ही दिए फल को देखकर स्तब्ध रह गए. जब उन्होंने पूरी सच्चाई का पता लगाया, तो उनका दिल टूट गया और संसार की मोह-माया से उनका विश्वास पूरी तरह उठ गया.
2. रानी पिंगला के सती होने की परीक्षा वाली कथा
• सच्चे प्रेम की परीक्षा: इस लोककथा के अनुसार, राजा भर्तृहरि एक बार जंगल में शिकार खेलने गए. वहाँ उन्होंने एक स्त्री को अपने मृत पति की चिता में बिना किसी संकोच के सती होते देखा. महल लौटकर जब उन्होंने यह बात रानी पिंगला को बताई, तो रानी ने कहा कि सच्ची पत्नी को चिता की आवश्यकता नहीं होती, वह तो पति की मृत्यु का समाचार सुनते ही अपने प्राण त्याग देती है.
• झूठा समाचार: राजा ने रानी की परीक्षा लेने के लिए कुछ समय बाद शिकार पर जाकर महल में अपनी मृत्यु का झूठा समाचार भिजवा दिया.
• वियोग में प्राण त्यागना: राजा की मृत्यु की खबर सुनते ही रानी पिंगला ने तड़पकर अपने प्राण त्याग दिए. जब राजा लौटे तो वे रानी की मृत्यु पर विलाप करने लगे और गहरे शोक में डूब गए.
• गोरखनाथ का चमत्कार: राजा का दुःख दूर करने के लिए गुरु गोरखनाथ वहां आए. उन्होंने मिट्टी का एक कमंडल तोड़ा और रोने का नाटक करने लगे. राजा ने कहा, "महाराज, कमंडल तो दूसरा बन जाएगा, आप क्यों रो रहे हैं?" गोरखनाथ ने जवाब दिया, "कमंडल तो दूसरा बन जाएगा, पर क्या तुम्हारी रानी वापस नहीं आ सकती?" इसके बाद गोरखनाथ ने अपनी शक्तियों से एक जैसी सैकड़ों पिंगला खड़ी कर दीं और राजा को दिखाया कि यह संसार सिर्फ एक भ्रम (माया) है.
वैराग्य और जोगी जीवन
इस आत्मज्ञान के बाद राजा भर्तृहरि ने अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को उज्जैन का राज-पाट सौंप दिया और सब कुछ त्याग कर वैराग्य धारण कर लिया. वे गुरु गोरखनाथ के परम शिष्य बने. गुरु के आदेश पर उन्होंने अपनी ही रानी पिंगला के महल जाकर उनसे "भिक्षा दे माते" कहकर पहली भिक्षा मांगी और आजीवन अध्यात्म के मार्ग पर चले.
राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का के पास भर्तृहरि धाम स्थित है, जहाँ आज भी उनकी तपोस्थली पर हर साल लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं. राजा भर्तृहरि ने संस्कृत में तीन प्रसिद्ध 'शतकों' (नीतिशतक, शृंगारशतक और वैराग्यशतक) की रचना भी की थी।
Singer: Jayram Jakhar
Singer village:-
Fogari (Didwana)
Singer Contact-:
9413202188,9783978722
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