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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग | सम्पूर्ण अध्याय अर्थ सहित 🙏✨

Sanatan stories" Geeta Hitopdesh, and many more"

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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग | सम्पूर्ण अध्याय अर्थ सहित 🙏✨

71 просмотр · 1 мес. назад
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🌺 अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग श्रीमद्भगवद्गीता का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को त्याग, संन्यास, कर्म, ज्ञान, कर्तव्य, गुण, स्वधर्म और मोक्ष का गहन ज्ञान प्रदान करते हैं। 🕉️ इस अध्याय में भगवान बताते हैं कि अपने कर्तव्य का पालन करते हुए कर्मों के फल का त्याग करना ही सच्चा त्याग है। मनुष्य को अपने स्वधर्म का पालन ईमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए। ✨ अध्याय 18 का मुख्य संदेश: “अपने सभी कर्म भगवान को समर्पित करके, अहंकार और फल की आसक्ति छोड़कर अपने कर्तव्य का पालन करो।” 📿 इस वीडियो में सुनिए श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 के सभी श्लोक सरल हिन्दी अर्थ/भावार्थ सहित, और जानिए भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य उपदेशों को जीवन में अपनाने का मार्ग। 🌸 कर्म • ज्ञान • त्याग • भक्ति • स्वधर्म • समर्पण • मोक्ष 🌸 🙏 श्रीकृष्ण के दिव्य ज्ञान को सुनें, समझें और अपने जीवन में उतारें। 💛 वीडियो पसंद आए तो Like 👍 | Share 📲 | Subscribe 🔔 जरूर करें। #BhagavadGita #Gita #ShrimadBhagavadGita #Adhyay18 #BhagavadGitaAdhyay18 #MokshaSannyasaYoga #मोक्षसंन्यासयोग #भगवद्गीता #श्रीमद्भगवद्गीता #Krishna #ShriKrishna #GitaGyan #KrishnaVani #GitaShlok #अर्थसहित #भावार्थ #गीता_ज्ञान #SanatanDharma #Spirituality #BhagavadGitaInHindi